बरेली

Sharad Purnima पर करेंगे ये काम तो रोग नहीं आएँगे पास और होगी धनवर्षा

धर्म शास्त्रों के अनुसार Sharad Purnima के दिन ”कोजागरी व्रत“ किया जाता है। इस दिन चंद्र दर्शन करने से कई रोगो से मुक्ति मिलती है|

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Oct 23, 2018
शरद पूर्णिमा पर करेंगे ये काम तो रोग नहीं आएँगे पास और होगी धनवर्षा

बरेली। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) कहते हैं। ज्योतिष की मान्यता है कि सम्पूर्ण वर्ष में केवल इसी दिन चन्द्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इसी दिन कोजागरी व्रत (Kojagri Vrat) किया जाता है। इसी को कौमुदी व्रत (Kaumudi Vrat) भी कहते हैं। इस बार यह व्रत 24 अक्टूबर को पड़ रहा है। बालाजी ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा के अनुसार इस दिन प्रातः 09ः23 बजे बाद आश्विनी नक्षत्र आरम्भ हो जाएगा जो कि सम्पूर्ण रात्रि रहेगा जो कि इस रात्री के लिए विशेष है शरद पूर्णिमा के दिन से ही व्रत एवं कार्तिक स्नान आरम्भ हो जायेगा। शास्त्रों के अनुसार इस दिन चन्द्रमा से अमृतवर्षा होती है और चन्द्रमा के सामने सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।

शरद पूर्णिमा पर मिलता है रोगों से छुटकारा

sharad purnima ज्योतिष एवं आयुर्वेद की दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है। इस दिन चन्द्रमा के दर्शन से तमाम रोगों से छुटकारा मिल जाता है। शरीर के रोग एवं चर्म रोग दूर होते हैं। मनोविकार और मनो रोगियो के लिए यह चन्द्रमा अति स्वास्थय वर्धक होता है नेत्र रोग वाले व्यक्तियों को इस चन्द्रमा के चन्द्रबिम्ब का एक टक दर्शन नेत्र संजीवनी के समान होता है। इस रात नेत्र रोग वाले व्यक्तियों को केवल चन्द्रमा की चांदनी में ही सुई में 100 बार धागा पिरोना चाहिए इससे नेत्रों की ज्योति बढती है इसी प्रकार जो हृदय रोग एवं फेफड़ों के रोग से ग्रसित हों उन्हे भी अमृतमयी चन्द्रमा की चांदनी में रखी खीर के सेवन से प्रचुर लाभ मिलता है।चन्द्रमा के अश्विनी नक्षत्र मे आने पर ही खीर को चांदनी में रखना चाहिए क्योकि अश्विनी नक्षत्र के देवता अश्विनी कुमार हैं। जो देवताओं के चिकित्सक हैं इसलिए अश्विनी नक्षत्र औषधीय गुणों से भरपूर है। इस पूर्णिमा को खीर का प्रसाद रात में ग्रहण किया जाता है।

माँ लक्ष्मी की बरसती है कृपा

इस पूर्णिमा को रात्रि जाग्रण का भी बहुत महत्व है इस पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है कोजागरी का अर्थ है कि कौन जाग रहा है पुराणो के अनुसार इस दिन लक्ष्मी जी भ्रमण पर निकलती है और जो जाग रहा होता है उस पर कृपा बरसती है।इस दिन इन्द्र एवं माता लक्ष्मी की पूजा करके श्रीसूक्त, लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ एवं माँ लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना चाहिए। रात्रिकाल में घी के 108 दीपक जलाने चाहिए, घर के विभिन्न स्थानों पर रखना चाहिए। इस दिन लक्ष्मी जी की विशेष कृपा उन पर होती है जो जाग रहा होता है।

कैसे करें पूजा
इस दिन प्रातः काल स्नान करके आराध्य देव को सुन्दर आभूषण से सुशोभित करके आसन, आचमन, वस्त्र, गन्ध, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप, नैवेध, ताम्बूल, सुपारी, दक्षिणा आदि से उनका पूजन करना चाहिए। रात्रि के समय गाय के दूध से बनी खीर अर्द्ध रात्रि के समय भगवान को अर्पण करना चाहिए। खीर को खुली चांदनी में रखकर दूसरे दिन उसका प्रसाद बांटना चाहिए। पूर्णिमा का व्रत करके कथा सुनना चाहिए। एक लोटे में जल तथा गिलास में गेहूं, पत्ते के दोनों में रोली तथा चावल रखकर कलश पर तिलक करके गेहूं के 13 दाने हाथ में लेकर कथा सुनना चाहिए, लोटे के जल का रात्रि को चन्द्रमा को अर्द्ध देना चाहिए।

Updated on:
24 Oct 2018 03:36 pm
Published on:
23 Oct 2018 09:36 am
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