बरेली

अतिक्रमण कार्रवाई पर सपा का सियासी संग्राम, सड़क पर उतरे नेता, नगर निगम पर पक्षपात के गंभीर आरोप

नगर निगम द्वारा शहर में चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर गुरुवार को सियासत गरमा गई। समाजवादी पार्टी के कई बड़े नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और कोहाड़ापीर रोड पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

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Apr 09, 2026

बरेली। नगर निगम द्वारा शहर में चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर गुरुवार को सियासत गरमा गई। समाजवादी पार्टी के कई बड़े नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और कोहाड़ापीर रोड पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अचानक हुए इस प्रदर्शन से इलाके में हलचल मच गई और काफी देर तक नारेबाजी होती रही।

प्रदर्शन में पूर्व मेयर सुप्रिया एरन, राजेश अग्रवाल, डॉ अनीस बैग, पार्षद गौरव सक्सेना, रविन्द्र यादव और शमीम सुल्तानी समेत कई सपा नेता शामिल रहे। नेताओं ने नगर निगम की कार्यशैली पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निष्पक्ष नहीं है। उनका कहना था कि चुनिंदा क्षेत्रों को निशाना बनाकर कार्रवाई की जा रही है, जबकि अन्य स्थानों पर नजरअंदाज किया जा रहा है।

एक समुदाय को बनाया जा रहा टारगेट

सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि अभियान के नाम पर एक विशेष समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके भवनों को प्राथमिकता के साथ तोड़ा जा रहा है, जबकि अन्य अवैध निर्माणों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। नेताओं ने इसे प्रशासन की पक्षपातपूर्ण नीति करार देते हुए तत्काल सुधार की मांग की। प्रदर्शन के दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने मांग रखी कि अतिक्रमण हटाने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और समान रूप से लागू की जाए। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई में भेदभाव जारी रहा तो पार्टी इस मुद्दे को लेकर बड़ा जनआंदोलन खड़ा करेगी और सड़कों पर उतरकर विरोध तेज करेगी।

प्रदर्शन में दिखी अंदरूनी खींचतान

विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी भी खुलकर सामने आ गई। कई नेता अलग-अलग समूहों में खड़े नजर आए और मंच पर एकजुटता की कमी दिखाई दी। इससे यह साफ संकेत मिला कि मुद्दा भले ही एक हो, लेकिन संगठन के भीतर तालमेल की कमी बनी हुई है। प्रदर्शन के बाद सभी नेता वापस लौट गए, लेकिन जाते-जाते यह संदेश दे गए कि मामला यहीं शांत नहीं होगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर दबाव बढ़ सकता है।

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