बरेली

स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी ने ले ली अजय की जान… पेट दर्द पर झोलाछाप ने कर दिया था अंडकोष का ऑपरेशन, तीन महीने बाद मौत

झोलाछाप के गलत ऑपरेशन और स्वास्थ्य विभाग की कथित लापरवाही के बीच फंसे युवक अजय ने आखिरकार तीन महीने बाद दम तोड़ दिया। पेट दर्द की शिकायत लेकर गए अजय का अंडकोष का ऑपरेशन कर दिया गया। हालत बिगड़ती रही, परिवार दफ्तरों के चक्कर काटता रहा, मगर कार्रवाई में देरी होती रही।
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Mar 03, 2026
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बरेली। झोलाछाप के गलत ऑपरेशन और स्वास्थ्य विभाग की कथित लापरवाही के बीच फंसे युवक अजय ने आखिरकार तीन महीने बाद दम तोड़ दिया। पेट दर्द की शिकायत लेकर गए अजय का अंडकोष का ऑपरेशन कर दिया गया। हालत बिगड़ती रही, परिवार दफ्तरों के चक्कर काटता रहा, मगर कार्रवाई में देरी होती रही। अब मौत के बाद परिजन जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

बारादरी थाना क्षेत्र के डोहरा गौटिया निवासी शिशुपाल के बेटे अजय को 6 दिसंबर को पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई। जांच रिपोर्ट लेकर परिवार पीलीभीत बाईपास स्थित प्रथ्वी फार्मा क्लीनिक पहुंचा। वहां जयवीर नामक व्यक्ति ने खुद को डॉक्टर बताते हुए कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। आरोप है कि उसने पेशाब की जगह में पानी भरने की बात कहकर ऑपरेशन की सलाह दी और करीब 25 हजार रुपये ले लिए।

पेट की जगह कर दिया अंडकोष का ऑपरेशन

परिजनों का आरोप है कि पेट दर्द के नाम पर अजय का अंडकोष का ऑपरेशन कर दिया गया। इसके बाद 25 दिनों तक क्लीनिक बुलाकर पट्टी की गई और तीन बार टांके लगाए गए, लेकिन खून बहना नहीं रुका। दर्द बढ़ता गया, शरीर कमजोर होता गया और अजय चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गया। हालत गंभीर होने पर परिवार उसे बड़े अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां चिकित्सकों ने गलत ऑपरेशन की बात कही। इसके बाद परिवार को मामले की गंभीरता का एहसास हुआ।

ऑटो में लिटाकर पहुंचे सीएमओ कार्यालय

कार्रवाई न होने से नाराज परिजन 4 फरवरी को अजय को ऑटो में लिटाकर सीएमओ कार्यालय पहुंचे। उस दौरान अजय लगातार उल्टियां कर रहा था। परिजनों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से झोलाछाप खुलेआम क्लीनिक चला रहे हैं और शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं कराया जा रहा। हंगामे के बाद सीएमओ की ओर से आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। हालांकि परिजनों का आरोप है कि यदि पहले सख्त कार्रवाई होती तो आज यह नौबत नहीं आती।

क्लीनिक सील, मगर कार्रवाई में देरी

शिकायत के बाद नोडल अधिकारी ने क्लीनिक को सील तो करा दिया, लेकिन तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई और न ही पुलिस को पूरी रिपोर्ट भेजी गई। इस पर भी सवाल उठे। चर्चा रही कि आरोपी जयवीर खुद भी कार्यालय पहुंचा था। उसने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसने कोई ऑपरेशन नहीं किया और उस पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।

तीन महीने तक जूझने के बाद मौत

लगातार बिगड़ती तबीयत के बीच अजय जिंदगी की जंग लड़ता रहा। उपचार के बावजूद वह ठीक नहीं हो सका और मंगलवार को उसकी मौत हो गई। पुलिस ने पहले से दर्ज मुकदमे में लापरवाही से मौत की धारा बढ़ा दी है। परिवार में मातम पसरा है। परिजन स्वास्थ्य विभाग और आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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