जेल से अस्पताल और फिर मौत… एक कैदी की जिंदगी के आखिरी सफर ने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बरेली। जेल से अस्पताल और फिर मौत… एक कैदी की जिंदगी के आखिरी सफर ने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि इलाज शुरू करने से पहले 60 हजार रुपये की मांग की गई और रकम न मिलने पर इलाज में लापरवाही हुई, जिससे कैदी की मौत हो गई। मामला सामने आते ही ऑडियो वायरल होने से हड़कंप मच गया है।
शाही क्षेत्र के गांव खरसेनी निवासी पुष्पा देवी ने बताया कि उनके पति सत्यपाल पिछले करीब दो साल से केंद्रीय जिला कारागार बरेली में सजा काट रहे थे। 21 मार्च की सुबह जेल से फोन आया कि सत्यपाल की तबीयत खराब है और उन्हें जिला अस्पताल ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही पत्नी पुष्पा अपने बेटे आकाश के साथ अस्पताल पहुंच गईं।
जिला अस्पताल में हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने सत्यपाल को मेरठ के सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया। बेटा आकाश पुलिस के साथ एंबुलेंस से मेरठ रवाना हुआ, जहां इलाज की उम्मीद थी, लेकिन यहीं से विवाद की शुरुआत हो गई।
पुष्पा देवी का आरोप है कि मेरठ पहुंचने पर साथ गए पुलिस कर्मियों ने बेटे आकाश से कहा कि तुरंत इलाज शुरू कराने के लिए डॉक्टरों को 60 हजार रुपये देने होंगे। इस बातचीत का ऑडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें आकाश अपने गांव के प्रधान से बात कराता है और पुलिस कर्मी कथित तौर पर पैसे की मांग करता सुनाई देता है। ऑडियो में यह भी कहा गया कि सरकारी प्रक्रिया में दो-तीन दिन लगेंगे और मरीज की हालत इतनी खराब है कि इंतजार नहीं किया जा सकता।
पुष्पा देवी का आरोप है कि 60 हजार रुपये न देने के कारण उनके पति के इलाज में लापरवाही की गई। उन्होंने साफ कहा कि यदि समय पर इलाज मिल जाता तो उनके पति की जान बच सकती थी। इस घटना ने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़िता ने पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल और एसएसपी से की है। उन्होंने पुलिस कर्मियों और संबंधित अस्पताल के डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल है। वायरल ऑडियो और गंभीर आरोपों के चलते अब जांच की मांग तेज हो गई है। यदि आरोप सही पाए गए तो यह मामला जेल प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा दाग साबित हो सकता है।