पत्नी की हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या 12) ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने आरोपी पति को दोषी पाते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई, साथ ही 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। वहीं देवर और ससुर को दोषमुक्त करार दे दिया गया।
बरेली। पत्नी की हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या 12) ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने आरोपी पति को दोषी पाते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई, साथ ही 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। वहीं देवर और ससुर को दोषमुक्त करार दे दिया गया।
भोजीपुरा के गांव परसूनगला निवासी जमीला बेगम की तहरीर पर आधारित है। जमीला ने नौ जून 2023 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उन्होंने अपनी बेटी सरवीन की शादी 24 मई 2015 को इज्जतनगर थाना क्षेत्र के करमपुर चौधरी निवासी सरताज खां के साथ की थी। शादी के बाद से ही सरताज दहेज में कार की मांग कर रहा था। मांग पूरी न होने पर, जमीला के मुताबिक, सरवीन को ससुरालवालों ने ज़हर देकर मार डाला।
आरोप था कि पति सरताज खां के साथ देवर इरशाद, ससुर मुन्ने खां, ननद फूलजहां और सास रुखसाना ने मिलकर साजिश रची और सरवीन की जान ले ली। पुलिस ने जांच के बाद 6 दिसंबर 2023 को सरताज, इरशाद और मुन्ने खां के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह और 11 भौतिक साक्ष्य कोर्ट में प्रस्तुत किए गए। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक ने अपने बयान में बताया कि महिला की मौत किसी मुलायम कपड़े से गला कसने के कारण हुई थी।
सभी पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों पर विचार करते हुए कोर्ट ने सरवीन के पति सरताज को हत्या का दोषी ठहराया, जबकि इरशाद और मुन्ने को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत का यह निर्णय दहेज हत्या के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।