मोबाइल गुम हो जाए तो आम आदमी उम्मीद भी छोड़ देता है, लेकिन बरेली पुलिस ने यह सोच बदल दी है। जनवरी 2026 में खोए मोबाइल खोजकर लोगों को लौटाने में बरेली ने पूरे उत्तर प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर लिया।
बरेली। मोबाइल गुम हो जाए तो आम आदमी उम्मीद भी छोड़ देता है, लेकिन बरेली पुलिस ने यह सोच बदल दी है। जनवरी 2026 में खोए मोबाइल खोजकर लोगों को लौटाने में बरेली ने पूरे उत्तर प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर लिया। एसएसपी अनुराग आर्य की सख्त मॉनिटरिंग और ताबड़तोड़ कार्रवाई के दम पर पुलिस ने प्रदेश में नंबर वन का ताज पहन लिया।
जनवरी महीने में कुल 219 मोबाइल ट्रेस के लिए दर्ज हुए। इनमें से 130 मोबाइल बरामद कर सीधे उनके मालिकों के हाथ में सौंप दिए गए। रिकवरी प्रतिशत 59.36 रहा, जबकि बरामद मोबाइल की संख्या के आधार पर वॉल्यूम स्कोर सौ प्रतिशत रहा। सत्तर-तीस के फार्मूले से निकला अंतिम स्कोर 71.55 रहा, जिसने बरेली को प्रदेश में पहला स्थान दिला दिया।
पहले मोबाइल गुम होने पर लोग थाने के चक्कर काटते थे। अब तस्वीर बदली हुई है। हर शिकायत दर्ज होते ही टीम सक्रिय होती है। आईएमईआई नंबर के जरिए ट्रेसिंग, नेटवर्क कंपनियों से तालमेल और लगातार फॉलोअप और इसी रणनीति ने नतीजे बदले। एसएसपी अनुराग आर्य की सीधी निगरानी में थानों को साफ संदेश दिया गया कि मोबाइल गुमशुदगी को हल्के में लेने की गलती अब बर्दाश्त नहीं होगी। साइबर सेल ने तकनीकी जांच और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए मोबाइल की लोकेशन खंगाली। कई मोबाइल दूसरे जनपदों से भी बरामद किए गए। लगातार निगरानी और त्वरित कार्रवाई ने रिकवरी की रफ्तार तेज रखी। वॉल्यूम स्कोर सौ प्रतिशत होना इस बात का संकेत है कि संख्या के लिहाज से भी बरेली सबसे आगे रहा।
बरामद मोबाइल जब मालिकों को लौटाए गए तो कई लोगों की आंखों में राहत साफ झलक रही थी। बैंकिंग, दस्तावेज, फोटो, जरूरी डेटा सब कुछ उसी छोटे से मोबाइल में कैद रहता है। ऐसे में उसका वापस मिलना किसी बड़ी खुशी से कम नहीं। एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा। मोबाइल गुम होने पर तुरंत सूचना देने और आईएमईआई नंबर सुरक्षित रखने की सलाह दी जा रही है। खोए मोबाइल की वापसी ने साबित कर दिया है, जब निगरानी सख्त हो और मंशा साफ हो, तो नतीजे भी नंबर वन ही आते हैं।