- सीमावर्ती चार जिलों की बॉर्डर विंग होमगार्ड - 2664 जवानों को नहीं किया जा रहा स्थायी
बाड़मेर. सीमावर्ती बाड़मेर, जैसलमेर , श्रीगंगानगर और बीकानेर की बॉर्डर विंग होमगार्ड के 2664 जवान स्थायी होने का इंतजार कर रहे हैं जबकि असम, गुजरात, मेघालय, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल में विंग के जवान स्थायी हो चुके हैं। बीएसएफ से कंधे से कंधा मिलाकर मुस्तैदी दिखा चुके इन जवानों को हथियार व कमांडों का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है लेकिन इन दिनों छिपी बेरोजगारी को झेल रहे हैं।
प्रदेश के चार जिलों में कार्यरत इन जवानों को ड्यूटी पर भुगतान होता है। पूरे महीने की ड्यूटी पर 20 हजार के करीब मानदेय मिलता है लेकिन ड्यूटी नियमित नहीं मिलती। आपात स्थिति, चुनाव और विशेष कार्य पर यह ड्यूटी महीने में औसत दस दिन ही बन पाती है। एेसे में सात-आठ हजार रुपए पर ही संतोष करना पड़ता है।
हथियार सार संभाल और सब कुछ
इन जवानों को सरकार ने हथियार और वर्दी दे रखी है। एेसे में इनको हर समय खुद को फिट भी रखना होता है। इतने कम मानदेय में यह संभव नहीं हो पा रहा है। इसे लेकर कई बार सरकार से गुहार की लेकिन अभी तक इनको छिपी बेरोजगारी से बाहर नहीं निकाला गया है।
कंधे से कंधा मिलाकर ड्यूटी
वर्ष1965 में भारत-पाक युद्ध के बाद सीमा सुरक्षा को लेकर 1968 में अंतरराष्ट्रीय सीमा वाले बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जिलों में 2664 जवानों की भर्ती निकालकर तैनात किया गया था। करगिल, संसद पर हुए आतंकवादी हमले,ऑपरेशन पराक्रम में कंधे से कंधा मिलकर डटे रहे। सीमा पर तारबंदी होने के बाद आंतरिक सुरक्षा व कानून व्यवस्था का जिम्मा भी निभाया। सीमावर्ती बाड़मेर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर और बीकानेर की बॉर्डर विंग होमगार्ड के 2664 जवान स्थायी होने का इंतजार कर रहे हैं जबकि असम, गुजरात, मेघालय, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल में विंग के जवान स्थायी हो चुके हैं।
पत्र लिखकर की मांग
इस मामले में पत्र लिखकर सरकार से मांग की गई थी। बॉर्डर विंग होमगार्ड की राज्य की चारों बटालियन को नियमित किया जाना चाहिए।- मानवेन्द्रसिंह, विधायक शिव बाड़मेर