
बालोतरा: तप, त्याग और आत्मसंयम की प्रेरणादायी मिसाल पेश करते हुए बालोतरा की महज 6 वर्षीय बिटिया चाहत संचेती ने लगातार 8 दिन की तपस्या कर समाज में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इतनी कम उम्र में आठ दिन तक तपस्या करना अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि है। तेरापंथ समाज के लोगों ने नन्हीं तपस्विनी के इस कठिन तप के लिए उनकी खूब-खूब अनुमोदना की।
बताया गया कि बालिका चाहत संचेती ने महातपस्वी युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या प्रोफेसर डॉ. साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से इस तपस्या को पूर्ण किया। साध्वीश्री के मार्गदर्शन और आध्यात्मिक प्रेरणा से चाहत ने दृढ़ संकल्प के साथ तपस्या का क्रम आगे बढ़ाया और आठ दिन की तपस्या सफलतापूर्वक पूरी की।
छोटी सी उम्र में जहां बच्चे सामान्यतः खेल-कूद और अन्य गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं, वहीं चाहत संचेती ने तप, संयम और आत्मानुशासन का मार्ग अपनाकर समाज के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। आठ दिनों की तपस्या के दौरान बालिका ने दृढ़ मनोबल और आत्मसंयम का परिचय दिया।
चाहत की इस तपस्या को लेकर तेरापंथ समाज में विशेष उत्साह और प्रसन्नता का वातावरण है। समाजजनों ने कहा कि इतनी कम उम्र में तपस्या के प्रति बालिका का समर्पण निश्चित रूप से अन्य बच्चों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा का विषय है।
तपस्विनी चाहत संचेती के दादा लक्ष्मीपत संचेती ने बताया कि उनके परिवार के लिए यह अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का अवसर है। संचेती परिवार का मूल निवास मोमासर है, जबकि वर्तमान में उनका परिवार बालोतरा में प्रवासी है। उन्होंने बताया कि बालोतरा में तेरापंथ समाज में इतनी कम उम्र की किसी बालिका द्वारा आठ दिन की तपस्या किए जाने का यह पहला अवसर है, जो समाज के लिए भी गौरव का विषय है।
उन्होंने बताया कि आचार्य श्री महाश्रमणजी के आशीर्वाद तथा उनकी सुशिष्या साध्वी प्रोफेसर डॉ. श्री मंगलप्रज्ञाजी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से पोती चाहत ने आठ दिन की तपस्या का संकल्प लिया और उसे पूर्ण किया। परिवार ने भी इस दौरान बालिका का उत्साह बढ़ाया और उसके संकल्प को पूरा करने में सहयोग किया।
चाहत की इस तपस्या में उसके दादा लक्ष्मीपत संचेती, दादी किरण देवी संचेती, पिता सुमित संचेती एवं माता नेहा संचेती का विशेष सहयोग और उत्साहवर्धन रहा। परिवार के सदस्यों ने बालिका के तप के दौरान उसका मनोबल बढ़ाया और उसके संकल्प को पूरा करने में हरसंभव सहयोग किया। परिवारजनों ने कहा कि इतनी कम उम्र में चाहत द्वारा तपस्या पूर्ण करना उनके लिए गर्व और आनंद का विषय है।
तेरापंथ समाज के श्रद्धालुओं ने तपस्विनी चाहत संचेती के तप की अनुमोदना करते हुए कहा कि तपस्या केवल धार्मिक साधना ही नहीं, बल्कि आत्मबल, अनुशासन, धैर्य और संकल्प की परीक्षा भी है। छह वर्ष की उम्र में चाहत द्वारा आठ दिन की तपस्या पूर्ण करना निश्चित रूप से विशेष उपलब्धि है।
समाजजनों ने नन्हीं तपस्विनी के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करते हुए उनके तप, त्याग और संयम की खूब-खूब अनुमोदना की। परिवार में भी इस उपलब्धि को लेकर हर्ष का वातावरण है। तपस्विनी चाहत संचेती की यह तपस्या बालोतरा के तेरापंथ समाज में लंबे समय तक एक प्रेरणादायी प्रसंग के रूप में याद की जाएगी।