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Jhunjhunu Nikay Chunav Result: मां, बेटा और बहू तीनों बने पार्षद, निर्दलीयों के दबदबे से BJP-कांग्रेस के उड़े होश

झुंझुनूं जिले में खेतड़ी नगर पालिका चुनाव मतगणना में 25 में से 13 वार्डों में निर्दलीयों ने कब्जा जमाया, जबकि भाजपा को 8 और कांग्रेस को 4 सीटें मिलीं। पूर्व अध्यक्ष उमराव सिंह की पत्नी पुष्पा देवी (वार्ड 15), बेटे पारस (वार्ड 12) और पुत्रवधू किरण (वार्ड 13) ने निर्दलीय जीतकर बाजी मारी।
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झुंझुनू

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Arvind Rao

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Updated: 15 Sep 2026, 6:21 PM IST

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पारस वर्मा, किरण बाला और पुष्पा देवी (पत्रिका फोटो)

Jhunjhunu Nikay Chunav Result: खेतड़ी (झुंझुनूं): खेतड़ी नगर पालिका के 25 वार्डों के चुनाव परिणाम सोमवार को घोषित हुए। मतगणना के बाद सामने आए नतीजों में निर्दलीय प्रत्याशियों का दबदबा देखने को मिला। कुल 25 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने 13 वार्डों में जीत दर्ज की। वहीं भाजपा के खाते में 8 और कांग्रेस को 4 वार्डों में जीत मिली। नतीजों के बाद नगर पालिका की राजनीति में निर्दलीयों की भूमिका अहम हो गई है।

वार्ड नंबर 5 में कांग्रेस प्रत्याशी गीता देवी ने 178 मतों के अंतर से जीत हासिल की। गीता देवी को कुल 411 मत मिले, जो इस चुनाव में किसी प्रत्याशी की ओर से प्राप्त सर्वाधिक मत रहे। वहीं सबसे करीबी मुकाबला वार्ड नंबर 17 में देखने को मिला। यहां कांग्रेस प्रत्याशी राहुल ने भाजपा के राजेश कुमार को महज 12 मतों के अंतर से हराया। वार्ड नंबर 21 में भी मुकाबला बेहद नजदीकी रहा और जीत-हार का अंतर केवल 14 मतों का रहा।

एक ही परिवार के तीन सदस्य जीते

खेतड़ी नगर पालिका चुनाव में एक परिवार के तीन सदस्यों की जीत भी चर्चा का विषय रही। पूर्व पालिका अध्यक्ष उमराव सिंह कुमावत की पत्नी पुष्पा देवी ने वार्ड नंबर 15 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की। उनके पुत्र पारस वर्मा ने वार्ड नंबर 12 और पुत्रवधू किरण बाला ने वार्ड नंबर 13 से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की। इस तरह एक ही परिवार के मां, बेटा और पुत्रवधू तीनों पार्षद चुने गए।

पति-पत्नी भी बने पार्षद

इसी तरह वार्ड नंबर 3 से निर्दलीय प्रत्याशी बुलाराम ने जीत दर्ज की, जबकि उनकी पत्नी सुमित्रा ने वार्ड नंबर 24 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता। दोनों पति-पत्नी अब नगर पालिका में पार्षद होंगे। चुनाव रिटर्निंग अधिकारी सुनील कुमार चौहान ने बताया कि चुनाव परिणाम घोषित होने के तीन दिन के भीतर सभी विजेता प्रत्याशी उपखंड अधिकारी कार्यालय से अपना निर्वाचन प्रमाण पत्र प्राप्त कर लें।

कांग्रेस बड़ी पार्टी बनकर उभरी, बीजेपी को कई शहरों में झटका

झुंझुनूं जिले की एक नगर परिषद समेत 19 नगर निकायों के चुनाव परिणाम ने स्थानीय राजनीति की नई तस्वीर सामने रख दी है। सोमवार को 551 वार्डों के परिणाम घोषित होने के साथ 2407 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला हो गया। इससे पहले बगड़ में एक, मंड्रेला में एक और बिसाऊ में दो प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे।

चुनाव परिणामों में सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह रहा कि कांग्रेस ने भाजपा से ज्यादा सीटें हासिल कीं। लेकिन दोनों दलों से भी ज्यादा सीटों पर निर्दलीयों ने कब्जा जमाया। कुल 555 वार्डों में कांग्रेस के 194, भाजपा के 157, निर्दलीयों के 203 और सीपीआईएम का एक पार्षद निर्वाचित हुआ। इस तरह निकाय चुनाव में निर्दलीय किंगमेकर बनकर उभरे हैं। कई निकायों में यही निर्दलीय अध्यक्ष के चुनाव में सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखेंगे।

कांग्रेस की बढ़त, भाजपा कई निकायों में पिछड़ी

चुनाव परिणाम में कांग्रेस ने जिले के कई बड़े निकायों में अपनी स्थिति मजबूत की है। झुंझुनूं नगर परिषद में कांग्रेस ने 30 सीटों के साथ स्पष्ट बढ़त बनाई, जबकि भाजपा 15 और निर्दलीय भी 15 सीटों पर रहे। इसी तरह मंडावा में कांग्रेस ने 16, नवलगढ़ में 24, चिड़ावा में 13, सिंघाना में 13 और सुलताना में 12 सीटें जीतकर भाजपा से बढ़त बनाई।

खास बात यह है कि नवलगढ़ और मंडावा जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण निकायों में कांग्रेस का प्रदर्शन भाजपा पर भारी रहा। नवलगढ़ के 45 वार्डों में कांग्रेस को 24 और भाजपा को 15 सीटें मिलीं। मंडावा में कांग्रेस 16 सीटों के साथ सबसे आगे रही, जबकि भाजपा के खाते में छह सीटें आईं।

भाजपा ने भी कुछ गढ़ बचाए, लेकिन एकतरफा नहीं

भाजपा ने भी कई निकायों में दमदार प्रदर्शन किया। जाखल में भाजपा ने 20 में से 15 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। बिसाऊ में भाजपा 13 सीटों के साथ कांग्रेस से एक कदम आगे रही। बुहाना में भाजपा ने नौ और कांग्रेस ने आठ सीटें जीतीं। झुंझुनूं नगर परिषद के अलावा जाखल और बिसाऊ जैसे निकायों में भाजपा का प्रदर्शन संगठन की मजबूती का संकेत देता है। हालांकि जिले के कुल आंकड़ों में भाजपा कांग्रेस से 37 सीट पीछे रह गई।

सबसे बड़ा फैक्टर निर्दलीय, भाजपा-कांग्रेस के गणित को उलझाया

इस चुनाव की सबसे दिलचस्प तस्वीर निर्दलीयों की जीत है। 203 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए स्थानीय सत्ता का गणित उलझा दिया है। पिलानी में तो तस्वीर पूरी तरह अलग रही। यहां 35 वार्डों में भाजपा के केवल तीन और कांग्रेस के दो प्रत्याशी जीत पाए, जबकि 30 निर्दलीय पार्षद चुने गए। पड़ोसी विद्याविहार में भी 25 में से 21 सीटें निर्दलीयों के खाते में गईं और कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला। चिड़ावा में 22, मंड्रेला में 11, डूंडलोद में 10, खेतड़ी में 13, सूरजगढ़ में 11 और सिंघाना में 13 निर्दलीय जीतकर आए हैं। ऐसे में इन निकायों में अध्यक्ष के चुनाव के समय निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका में रहेंगे।

कहीं भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, कहीं तीसरा मोर्चा मजबूत

परिणामों की खास बात यह भी है कि जिले के निकायों में कोई एक जैसा राजनीतिक पैटर्न नहीं बना। कुछ निकायों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला दिखा तो कई जगह निर्दलीयों ने दोनों दलों का गणित बिगाड़ दिया। जाखल और बिसाऊ में भाजपा का पलड़ा भारी, जबकि झुंझुनूं, नवलगढ़, मंडावा, सुलताना और मलसीसर में कांग्रेस आगे रही। वहीं पिलानी, विद्याविहार, चिड़ावा और खेतड़ी जैसे निकायों में निर्दलीयों ने दोनों प्रमुख दलों को पीछे छोड़ दिया।

दल पीछे, निर्दलीय आगे…अब अध्यक्ष की कुर्सी किसके साथ?

555 वार्डों की तस्वीर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन 203 निर्दलीय पार्षदों ने दोनों प्रमुख दलों से ज्यादा सीटें जीतकर स्थानीय चुनाव की सियासत का नया समीकरण बना दिया है। अब कई निकायों में अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों को निर्दलीयों के दरवाजे पर दस्तक देनी पड़ेगी।

चेयरमैन की कुर्सी पर अब असली परीक्षा

पार्षदों के परिणाम के बाद अब राजनीतिक दलों की नजर अध्यक्ष और सभापति की कुर्सी पर टिक गई है। जहां किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, वहां निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बढ़ गई है। ऐसे में अगले कुछ दिन समर्थन जुटाने, बाड़ाबंदी और राजनीतिक जोड़तोड़ के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे। खासकर पिलानी, चिड़ावा, खेतड़ी, मंड्रेला, सूरजगढ़, उदयपुरवाटी और सिंघाना जैसे निकायों में निर्दलीयों की संख्या सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखेगी। परिणाम आने के बाद अब मुकाबला चुनाव मैदान से निकलकर चेयरमैन बनाने की सियासत में पहुंच गया है।

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