बाड़मेर

आखिर अब ली वन्य जीवों की सुध, आजादी के 70 साल बाद वन्य जीवों सुरक्षा को लेकर जिले में पहला बड़ा कदम

- आजादी के 70 साल बाद जिले में पहला रेस्क्यू सेंटर स्वीकृत - जिल में हर माह बीस-तीस हरिण हो रहे दुर्घटना का शिकार, नहीं मिल रहा समय पर इलाज

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70 years after independence First Rescue Center Accepted in District

बाड़मेर. राज्य पशु चिंकारा के स्वच्छंद विचरण के लिए विख्यात थार के धोरों में अब इनकी सुरक्षा को लेकर रेस्क्यू सेंटर की स्वीकृति मिली है। आजादी के 70 साल बाद जबकि हर दूसरे-तीसरे दिन हरिण घायल होने की सूचना आ रही है, तब सरकार चेती और जिले का पहला रेस्क्यू सेंटर स्वीकृत किया है। करीब चार लाख में बनने वाले इस सेंटर पर इलाज के साथ वन्य जीवों को रखने का प्रबंध होगा।

चार लाख में बनेगा सेंटर तो मिलेगी इलाज के साथ सुरक्षा

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सीमावर्ती जिला बाड़मेर वन्य जीवों की विविधता को लेकर जाना जाता है। यहां गिद्ध, गोडावण, चीतल, काला हरिण, सारस, लोमड़ी, चील्र सियार, जरख, जंगली बिल्ली, चिंकारा, खरगोश आदि वन्य जीव पाए जाते हैं। इन जीवों का स्वच्छंद विचरण गांव-गांव देखा जा सकता है। हालांकि बदलते वक्त के साथ वन्य जीवों की तादाद कम हुई है, लेकिन अभी भी राज्य पशु चिंकारा, खरगोश, लोमड़ी, जंगली बिल्ली सहित कई वन्य जीव अभी भी विचरण करते हुए देखे जा सकते हैं। कुछ साल पहले तक तो वाहनों की कम तादाद और सड़कों की कमी के चलते इनको घूमने-फिरने में कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन अब इसके चलते वन्य जीवों को दिक्कत हो रही है। सड़क पार करते समय वाहनों की चपेट में आने से हर माह कई वन्य जीवन विशेषकर हरिण चोटिल हो रहे हैं। एेसे में इनके इलाज व देखभाल को लेकर रेस्क्यू सेंटर की जरूरत महसूस की जा रही थी, लेकिन जिले में यह व्यवस्था कहीं पर भी नहीं है। एेसे में वन्यप्रेमी जब भी घायल वन्य जीव को लेकर वन विभाग के पास जाते तो यह जवाब मिलता, हम इसे कहां रखेंगे। हालांकि धोरीमन्ना व बाड़मेर में अस्थायी तौर पर रेस्क्यू सेंटर तो बने हैं, लेकिन इनको वन विभाग कार्मिकों ने अपने स्तर पर बना कर संचालित कर रहे हैं। अब रेस्क्यू सेंटर की घोषणा से वन्य जीवों को इलाज के साथ सुरक्षा भी मिल सकेगी।
जिले में इतने वन्य जीव- जानकारी के मुताबिक जिले में करीब चालीस-पचास हजार वन्य जीव हैं। इनमें से सर्वाधित संख्या राज्य पशु चिंकारा की है। इसके अलावा सियार, लोमड़ी, काला हरिण, लंगूर, जरख, जंगली बिल्ली, भेडि़या, नेवला, झाऊ चूहा आदि भी हैं।

पहला रेस्क्यू सेंटर- जिला का पहला रेस्क्यू सेंटर स्वीकृत हुआ है। इससे अब दुर्घटना में घायल वन्य जीवों को इलाज के साथ देखभाल का फायदा मिलेगा। जिले में करीब पचास हजार वन्य जीव होंगे। इस सेंटर के खुलने से राज्य पशु चिंकारा सहित अन्य जीवों को इलाज के साथ सुरक्षा मिलेगी।- खेतराम कालमा, जिला परिषद सदस्य
जरूरी है रेस्क्यू सेंटर- जिले में हरिणों पर कुत्तों के हमले व दुर्घटनाओं की तादाद बढ़ रही है। वन विभाग के पास रेस्क्यू सेंटर नहीं होने से दिक्कत होती है। अब सेंटर खुलता है तो इसका फायदा मिलेगा।- बाबूलाल मांजू, जिला परिषद सदस्य

स्वीकृति आई है- जिले में रेस्क्यू सेंटर की स्वीकृति मिली है। वैसे धोरीमन्ना में छोटा रेस्क्यू सेंटर है। यह सेंटर स्वीकृत होने से वन्य जीवों का इलाज व देखभाल होगी।- वी के प्रधान, उप वन संंरक्षक वन विभाग बाड़मेर

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Published on:
26 Dec 2017 03:20 pm
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