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रिपोर्ट – आधी-अधूरी बिजली, पानी के लिए पड़ोसी पर निर्भरता की मजबूरी, विधानसभा क्षेत्र चौहटन के हाल, जानिए पूरी खबर

-- चार साल बाद भी सुविधाओं को तरस रहा आदर्श गांव - विधानसभा क्षेत्र चौहटन- आरओ प्लांट के स्वच्छ पानी का सपना लील गया बिजली का बिल  

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Half-power Forced dependence on neighbors for water in chauhtan

चौहटन. चुनावों से पहले किए गए वादे 4 साल बीत जाने के बाद भी पूरे होते दिखाई नहीं दे रहे। मरुस्थल में बसे इस सीमावर्ती इलाके में पीने के पानी की समस्या के अलावा बिजली, चिकित्सा, शिक्षा, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास में भी कोई खास बदलाव नजर नहीं आया। चौहटन इलाके के लोगों की समस्याएं आज भी ज्यों की त्यों है। पीने के पानी की समस्या मिटाने के लिए नर्मदा का पानी और चौहटन कस्बे में उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालय खोलने की उम्मीदें सहेजी गई थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं। विधायक के आदर्श गांव में ही लोग स्वच्छ पानी को तरस गए हैं। क्षेत्र के हालात को बयां करती यह रिपोर्ट...

आदर्श गांव मिठड़ाऊ के हाल
पेयजल : यहां विधायक, बीएडीपी तथा अन्य मदों से करीब 7.50 करोड़ रुपए खर्च हुए, लेकिन ग्रामीणों को पीने लिए स्वच्छ पानी नसीब नहीं हो रहा। यहां लगाए गए दोनों आरओ प्लांट बंद पड़े हैं। इनकी सार-संभाल करने वाला भी कोई नहीं। ग्रामीणों के अनुसार आरओ प्लांट की बिजली का बिल जमा नहीं करवा पाने के कारण यह पिछले डेढ़ साल से बंद पड़ा है। ऐसे में यह गांव आज भी पानी के लिए दूसरे गांवों पर निर्भर है। यहां नया ट्यूबवेल खुदवाने सहित घर-घर नल कनेक्शन देने का वादा भी अभी पूरा नहीं हुआ है।

बिजली : गांव में बिजली के घरेलू कनेक्शन है, लेकिन कुओं पर विद्युत आपूर्ति सरूपे का तला जीएसएस से ही होती है। इस कारण जब कृषि कुओं पर बिजली आपूर्ति चालू की जाती है तो घरेलू बिजली की आपूर्ति बंद कर दी जाती है। उन्हें चौबीस घंटों में से महज 8-10 घंटे ही बिजली ही नसीब हो रही है।
सड़क : गांव के कुछ गली-मोहल्लों में सीसी सड़कें जरूर बनाई गई है, लेकिन आदर्श गांव के तय मापदण्ड अनुसार सड़कें 4 साल बाद भी नजर नहीं आती।

पानी निकासी : गंदे पानी की निकासी के लिए नालियों का निर्माण नहीं होने से कई स्थानों पर कीचड़ जमा पड़ा है। यहां के जीएलआर और मुख्य जल संग्रहण केन्द्र के पास बनी खेळियों और सार्वजनिक नलों पर टूंटियां नहीं होने से गांव के बीचों-बीच लंबे समय से गंदे पानी का तालाब बना हुआ है।
चिकित्सा : यहां के पीएचसी को आदर्श का दर्जा जरूर मिला, लेकिन भौतिक व मानवीय संसाधन तथा सुविधाओं के नाम पर कोई बदलाव नहीं हुए।


चौहटन में नजर नहीं आया बदलाव

उपखंड मुख्यालय चौहटन क्षेत्र का एकमात्र बड़ा कस्बा है। यहां की एकमात्र मुख्य सड़क के किनारे नाले का निर्माण नहीं होने से पानी और कीचड़ सड़कों पर पसरा रहता है। रोडलाइट, साफ-सफाई, सड़क और गंदे पानी की निकासी की सुविधा मात्र ग्राम पंचायत की निजी आय पर निर्भर है। कस्बे के सौंदर्यीकरण, क्रीड़ा स्थल, खेल मैदान, पार्क आदि के लिए कोई काम नहीं हुआ। चुनाव पूर्व लोगों ने कस्बे में महाविद्यालय खुलवाने तथा अग्निशमन वाहन का सपना देख देखा था, लेकिन ये आज भी अधूरे हैं।
नर्मदा के नीर से नहीं हुए हलक तर

नर्मदा का पानी चौहटन के 324 गांवों में पहुंचाने के लिए 1000 करोड़ से भी अधिक राशि स्वीकृत हुई, लेकिन योजना को अब तक मूर्त रूप नहीं मिल पाया है। नर्मदा के पानी से हलक तर कर पाने का सपना आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। गांवाई इलाकों में पाइप लाइन, जीएलआर, हैण्डपंप, नए ट्यूबवेल खुदवाने सहित अधिकांश गांवों में स्थानीय जलस्रोतों को विकसित करवा पेयजल समस्या मिटाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में पेयजल समस्या का स्थायी हल कहीं नजर नहीं आता।

किए हैं पूरे प्रयास
4 साल से पहले और आज के परिदृश्य को तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए। मिठड़ाऊ में 7.50 करोड़ रुपए के विकास कार्य करवाए गए हैं। सड़कें, स्कूल, चिकित्सालय, स्टेडियम, बस स्टैण्ड, पीने का पानी, बिजली सहित किसी भी पहलू को अनछुआ नहीं रखा। सरकारी योजनाओं का क्षेत्र को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है।

तरुणराय कागा, विधायक चौहटन

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