
Doctors strike 9 days No doctor in OPD Wander patients for treatment
बाड़मेर. सेवारत चिकित्सकों की अनश्चितकालीन हड़ताल व सरकार की हठधर्मिता आमजन के लिए आफत बन गई है। जिले भर में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई है। चिकित्सकों व सरकार ने मरीजों को रामभरोसे छोड़ दिया है। इधर, दवाई विक्रेता का कहना है कि प्रतिदिन की बिक्री तीस फीसदी रह गई है।
जिले के राजकीय अस्पताल में सोमवार को ओपीडी 304 रही। यहां अस्पताल के वार्डों में सन्नाटा पसरा हुआ नजर आ रहा है। गंभीर मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार मिलता है। उसके बाद तत्काल रैफर किया जा रहा है। जिला अस्पताल में पीएमओ सहित अन्य चिकित्सक व्यवस्था संभाल रहे हैं, नाममात्र के चिकित्सकों के भरोसे मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। राजकीय अस्पताल में दो चिकित्सक मेडिकल कॉलेज से व्यवस्था के लिए भेजे गए हैं। वहीं सोमवार को निजी संस्थानों की ओर से लगाए गए तीन चिकित्सक सांकेतिक हड़ताल पर रहे।
वैकल्पिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं
राजकीय अस्पताल में हड़ताल के मद्देनजर वैकल्पिक व्यवस्था के लिए चिकित्सा विभाग ने केयर्न के चिकित्सक व अन्य आयुष विशेषज्ञों को लगा रखा है। लेकिन मरीज हमेशा उपचार लेने वाले चिकित्सक को तलाश रहे हैं। लेकिन चिकित्सक हड़ताल पर होने से ऐसे मरीज व परिजन निवास स्थल तक पता लगाते हैं, नहीं मिलने पर निराश लौट रहे हैं। लम्बा इलाज ले रहे कई मरीज पुरानी पर्ची से दवा लेकर काम चला रहे हैं।
झौलाछाप की चल निकली
चिकित्सकों की हड़ताल के चलते जिला अस्पताल व सीमावर्ती क्षेत्रों में पीएचसी व सीएचसी पर मरीजों को उपचार नहीं मिल रहा है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय झोलाछाप चिकित्सकों की चल निकली है।
दवा विक्रेता बेपटरी
जिले भर में चिकित्सकों की हड़ताल के चलते दवाई व्यापार प्रभावित हो रहा है। प्रतिदिन जिले भर में करीब 30 लाख रुपए की दवा बिक्री होती थी, जो इन दिनों महज 7-8 लाख रुपए पर आ गई है। सरकारी में हड़ताल की वजह से निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
मानव धर्म निभाने का आग्रह
बाड़मेर आमजन हितार्थ संघर्ष समिति के बैनर तले सर्व समाज के लोगों ने हड़ताल पर गए चिकित्सकों के निवास पहुंचकर उनके परिजनों से मिले। गुलाब का फूल देते हुए चिकित्सकों के ड्यूटी पर आने का आग्रह किया। उन्होंने चिकित्सकों को पत्र लिख कर मानव धर्म निभाने के लिए ड्यूटी पर आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। ऐसी ही स्थिति प्रसूताओं के साथ है।
- दवा बिक्री में आई कमी
चिकित्सकों की हड़ताल के चलते दवा बिक्री में भारी कमी आई है। यह हालात ज्यादा दिन तक बने रहे तो मेडिकल दुकानें स्वत: बंद हो जाएगी। सरकार सहानुभूति तरीके से हल निकालें। मांगे मानना तो दूर की बात सरकार वार्ता तक नहीं कर रही है।
- बद्रीप्रसाद शारदा, सचिव, जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन बाड़मेर
Published on:
26 Dec 2017 01:30 pm
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