
बालोतरा। 'मन से नहीं पढ़ोगे तो हनुमान चालीसा भी काम नहीं आएगी…' फिल्म ‘हनुमान अंश’ में यह संवाद बोलकर चर्चा में आए बालोतरा के अभिनेता गजेंद्र सुथार इन दिनों अपने शहर आए हुए हैं। गजेंद्र पिछले कुछ वर्षों से मुंबई में रहकर अभिनय कर रहे हैं। फिल्म में उन्होंने चाय वाले का करीब साढ़े तीन मिनट का किरदार निभाया है, जिसे बाबा नीम करोली का ही एक रूप बताया गया है। इस छोटे से किरदार को दर्शकों का खूब प्यार मिला। ऐसे में बालोतरा में गजेंद्र सुथार ने पत्रिका से विशेष बातचीत की है।
गजेंद्र का जवाब : फिल्म रिलीज होने के बाद शुरुआती तीन दिनों में कमाई कम रही तो लगा कि शायद इस बार भी नंबर नहीं लगेगा। बाद में फिल्म ने रफ्तार पकड़ी और दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला। लोग आधे घंटे के रोल के बाद कलाकारों को भूल जाते हैं, लेकिन बाबा की कृपा से मेरा तीन मिनट का रोल लोगों के दिलों में बस गया। फिल्म ने ‘टॉक्सिक’, ‘अवतार 2’ और ‘स्पाइडर मैन’ जैसी बड़ी फिल्मों के बीच भी अपनी जगह बनाई। वे इसे बाबा की कृपा मानते हैं।
गजेंद्र का जवाब : रणबीर कपूर और साई पल्लवी की बड़े बजट की फिल्म ‘रामायण’ में केवट की भूमिका निभाई है। इसके अलावा एक और फिल्म ‘बॉम्बे कैफे’ आने वाली है। कई फिल्मों में काम करने के बावजूद ‘हनुमान अंश’ हमेशा दिल के सबसे करीब और खास रहेगी। मैं हनुमानजी का उपासक हूं और एक संकल्प के तहत 13 माह हनुमान चालीसा का पाठ कर चुका हूं। यह सब बाबा की मेहरबानी है।
गजेंद्र का जवाब : भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जुड़ी फिल्में लगातार बननी चाहिए। ऐसी फिल्मों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़ने का अवसर मिलता है। आज विदेशों में भी भारतीय संस्कृति का प्रसार हो रहा है, इसलिए अच्छे संदेश वाली फिल्मों का निर्माण जारी रहना चाहिए।
गजेंद्र का जवाब : ‘हनुमान अंश’ के सेट का माहौल सात्विक था। वहां शुद्ध सात्विक भोजन बनता था और हर दिन शूटिंग की शुरुआत व पैकअप हनुमान चालीसा के पाठ से होता था। शूटिंग के दौरान कई बार लंगूर और बंदर भी शांत होकर सेट पर आकर बैठ जाते थे। शूटिंग के दौरान हनुमानजी की मूर्ति रखते समय एक लंगूर स्वयं वहां आकर बैठ गया और जयकारे लगने तक वहीं रहा, फिर चला गया।