बाड़मेर

Heart Attack: कमाऊ हाथ थमने से बिखर गया परिवार का सहारा, दिल का दौरा पड़ने से घर के मुखिया की मौत, बिलख उठा परिवार

पाटोदी क्षेत्र के ओकातिया बेरा निवासी प्रेम भारती की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। मिठाई बनाकर परिवार पालने वाले प्रेम ही घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। पीछे पत्नी, दो बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता रह गए।

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Feb 24, 2026
प्रेम भारती का परिवार (फोटो- पत्रिका)

बालोतरा: पाटोदी क्षेत्र के ओकातिया बेरा गांव निवासी प्रेम भारती पुत्र किशन भारती की अचानक हुई मौत ने पूरे परिवार की दुनिया बदल दी। परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य इस संसार को हमेशा के लिए अलविदा कह गया, जिससे घर के कई सपने अधूरे रह गए और परिजनों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया।

प्रेम भारती (37) मिठाई बनाने का कार्य करता था और अपने परिवार का पालन-पोषण इसी से करता था। परिवार को उम्मीद थी कि आने वाले दिनों में घर की आर्थिक स्थिति और बेहतर होगी। लेकिन अचानक घर पर ही उसे दिल का दौरा पड़ने पर परिजन नजदीकी चिकित्सालय नवातला ले गए। जहां से गंभीर हालत में जोधपुर रेफर किया गया। परंतु जोधपुर पहुंचने से पहले ही बीच रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।

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परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

प्रेम भारती एक सप्ताह पहले ही शादी समारोह में काम करके घर लौटा था। घर लौटने के बाद लंबे समय से सांस की तकलीफ से पीड़ित 80 वर्षीय पिता किशन भारती को जोधपुर में चिकित्सकों को दिखाकर दवाइयां दिलाई।

वहीं, वृद्ध मां हरकू देवी की देखभाल की जिम्मेदारी भी उसी के कंधों पर थी। प्रेम भारती की हार्ट अटैक से निधन के बाद उसकी पत्नी रुकमा देवी, दो बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है।

बड़ा बेटा नौवीं कक्षा में और छोटा बेटा सातवीं कक्षा में पढ़ता है। दोनों बच्चों ने पढ़ाई को लेकर कई सपने देखे थे, लेकिन अब परिवार के सामने भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है। प्रेम भारती के चार भाई हैं, जो स्वयं भी दैनिक मजदूरी कर अपने परिवार का गुजारा करते हैं।

अधूरा रह गया घर का सपना

प्रेम भारती का प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत हुआ था। परिवार को उम्मीद थी कि सरकारी सहायता और अपनी बचत से वह अपना घर बनाकर परिवार को सुरक्षित छत दे सकेगा, लेकिन यह सपना भी अधूरा रह गया।

ऐसे में परिवार की स्थिति को देखते हुए नवातला, ओकातिया बेरा सहित आसपास के क्षेत्रों के युवाओं ने सोशल मीडिया पर सहायता समूह बनाकर आर्थिक मदद का अभियान शुरू कर कुछ सहायता राशि जुटाई है।

लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि भामाशाहों और सरकार से सहयोग मिले तो परिवार को सहारा मिल सकेगा और बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ परिवार का जीवन फिर से पटरी पर आ सकता है।

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Updated on:
24 Feb 2026 03:03 pm
Published on:
24 Feb 2026 12:49 pm
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