Barmer Drug Smuggling: बाड़मेर में एटीएस ने पाकिस्तान सीमा से तस्करी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। आरोपी सलमान और शंकराराम से पूछताछ में खुलासा हुआ कि वे पहले भी जैसलमेर में ड्रग्स सप्लाई कर चुके हैं। इस बार गुजरात भेजी जा रही 5 किलो 'मेटाफेटामाइन' बरामद हुई है।
Indo-Pak Border Smuggling: बाड़मेर: भारत-पाकिस्तान सीमा पर मादक पदार्थों की तस्करी का बड़ा मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) की गिरफ्त में आए तस्करों से पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।
जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी पहले भी सीमा पार से आई ड्रग्स की खेप को आगे पहुंचाने में सफल हो चुका है, जिसके चलते उसे दोबारा बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। एटीएस द्वारा पकड़े गए आरोपी सलमान खान पुत्र लाला खान और शंकराराम पुत्र रमेशराम निवासी सज्जन का पार (रामसर) से गहन पूछताछ की जा रही है।
जांच में सामने आया कि सलमान ने करीब तीन महीने पहले दिसंबर-जनवरी के बीच जैसलमेर के म्याजलर क्षेत्र तक दो पैकेट ड्रग्स पहुंचाई थी। इसके बदले उसे 34 हजार रुपए मिले थे।
सूत्रों के अनुसार, पहली बार सफल डिलीवरी के बाद पाकिस्तान के तस्करों का भरोसा उस पर बढ़ गया। इसके बाद दूसरी खेप के रूप में पांच किलोग्राम मेटाफेटामाइन भेजी गई, जिसे गुजरात तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इस बार सलमान को 60 हजार रुपए एडवांस दिए गए थे, जबकि बाकी रकम डिलीवरी के बाद मिलने वाली थी। साथ ही उसे लालच दिया गया कि इस नेटवर्क से जुड़कर वह मोटी कमाई कर सकता है।
बाड़मेर पुलिस के पास 24 घंटे ही जांच रही। इसके बाद इस पूरे मामले की जांच एटीएस के एएसपी दुर्ग सिंह राजपुरोहित को सौंपी गई है। उन्होंने दोनों आरोपियों के साथ सीमा क्षेत्र में जाकर मौके की तस्दीक भी की है, जिससे तस्करी के रूट और तरीकों को समझा जा सके।
एटीएस अब इस नेटवर्क के अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और सीमा पार से ड्रग्स भेजने का पूरा तंत्र कैसे काम करता है।
सीमा पार से आई ड्रग्स के मामले में गहन जांच की जा रही है। दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। यह तस्कर पहले भी एक बार खेप पहुंचाने में सफल हो चुके हैं, इसलिए पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है।
-ज्ञानचंद यादव, एसपी, एटीएस