बाड़मेर

Rajasthan Panchayat Election: ‘पोलिंग पार्टी की शराब पार्टी?’ सरपंच चुनाव के बाद का कथित वीडियो वायरल, चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल

Polling Party Viral Video Controversy: बाड़मेर की शिव तहसील के झांफली कल्ला गांव में सरपंच चुनाव पर बड़ा विवाद। मतगणना के बाद पोलिंग पार्टी का आईडी कार्ड पहने शराब पार्टी करने का वीडियो वायरल।
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Updated: 31 Oct 2026, 12:43 PM IST
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वायरल हो रहे वीडियो की तस्वीरें

राजस्थान के पंचायती राज चुनाव 2026 के बीच बाड़मेर जिले के शिव तहसील क्षेत्र से एक चौंकाने वाला और प्रशासनिक गरिमा को तार-तार करने वाला मामला सामने आया है। जिले की झांफली कल्ला ग्राम पंचायत में सरपंच पद के चुनाव परिणाम आने के बाद मतगणना स्थल और पोलिंग पार्टी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चुनाव में उगमदान को विजयी घोषित किया गया, जबकि करणीदान को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन परिणाम आने के बाद सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ है, जिसने जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि मतदान और मतगणना कार्य में तैनात पोलिंग पार्टी के कुछ सदस्य गले में आधिकारिक आईडी कार्ड पहने हुए कथित तौर पर शराब पार्टी कर रहे हैं। वीडियो के साथ सामने आए ऑडियो और बयानों ने इस पूरे चुनाव को एक बड़े घोटाले और कथित मिलीभगत के घेरे में ला दिया है।

वायरल वीडियो में सुनाई दे रहे ये विवादित और गंभीर दावे

झांफली कल्ला ग्राम पंचायत से सामने आए इस कथित वीडियो में कई ऐसी बातें सुनाई देने का दावा किया जा रहा है जो चुनावी शुचिता पर सीधा प्रहार करती हैं:

"बूथ अपणो होन जीतायो हो, फुल एंड फाइनल" — यानी बूथ अपना था और चुनाव जिता दिया गया है।

"मजो कर दियो खोदे के" और "कुण देखे पनिया (पर्चियां), थोनो ही टेकना हो" जैसे संवादों के जरिए यह इशारा करने का दावा किया जा रहा है कि मतपत्रों या पर्चियों की जांच किए बिना ही परिणामों को तय कर दिया गया।

इसके अलावा, रिटर्निंग ऑफिसर (RO) की कथित बातचीत में भी वोटों की गिनती और प्रक्रिया में 'घोटाले व घपले' का जिक्र होने की चर्चा तेज हो गई है।

बिना हस्ताक्षर कराए हार-जीत की घोषणा के गंभीर आरोप

पराजित पक्ष और स्थानीय ग्रामीणों की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि मतगणना प्रक्रिया के दौरान नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। आरोप है कि बिना विधिवत हस्ताक्षर करवाए ही जल्दबाजी में परिणाम घोषित कर दिए गए, जिससे एक पक्ष को फायदा पहुंचाया जा सके।

ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि मतदान कराने वाले कार्मिक ही इस तरह चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर जश्न मनाएंगे और शराब पार्टी करेंगे, तो लोकतंत्र के इस पावन उत्सव का क्या औचित्य रह जाता है? यह घटना इस बात की तस्दीक करती है कि कुछ जगहों पर प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग किस हद तक किया जा रहा है।

निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की उठी मांग

इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद बाड़मेर जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भूचाल सा आ गया है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिला कलक्टर से मांग की है कि इस वायरल वीडियो की फॉरेंसिक और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

मामले की जांच में निम्नलिखित बिंदुओं को प्राथमिकता दिए जाने की मांग की जा रही है:

वीडियो में दिख रहे व्यक्ति कौन हैं और क्या वे वास्तव में झांफली कल्ला पंचायत में चुनाव ड्यूटी पर तैनात पोलिंग पार्टी के सदस्य थे या नहीं।

वीडियो में सुनाई दे रहे बयानों का वास्तविक संदर्भ क्या है और क्या मतदान व मतगणना में किसी प्रकार की धांधली की गई है।

बिना हस्ताक्षर के परिणाम घोषित करने के आरोपों की सत्यता की जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

फिलहाल इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी शेष है, लेकिन इसने बाड़मेर के पंचायती राज चुनावों में पारदर्शिता और शुचिता को लेकर एक बड़ा सवालिया निशान जरूर लगा दिया है।

Updated on:
31 Oct 2026, 12:43 PM IST
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