
सोशल मीडिया के इस दौर में अब लाइक्स और फॉलोअर्स बढ़ाने के नाम पर अपलोड की जाने वाली ग्लैमरस और स्टंट रील्स सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि शातिर साइबर और क्राइम गिरोहों का हथियार बन चुकी हैं। बाड़मेर जिले में हाल ही में उजागर हुए हनीट्रैप और किडनैपिंग के मामलों ने यह साफ कर दिया है कि किस तरह सोशल मीडिया के जरिए युवाओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को हुस्न के जाल में फंसाकर उनसे लाखों की रंगदारी वसूली जा रही है।
हालिया मामलों की पड़ताल से सामने आया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लग्जरी लाइफस्टाइल और स्टंट रील्स दिखाकर पहले शिकार की पहचान की जाती है, फिर धोखे से बुलाकर आपत्तिजनग वीडियो बनाए जाते हैं और बंदूक की नोक पर लाखों रुपए व चुनाव न लड़ने तक की धमकियां दी जाती हैं।
गुड़ामालानी क्षेत्र में एक महिला ने इंस्टाग्राम व व्हाट्सएप के जरिए पूर्व सरपंच से बातचीत शुरू की। इसके बाद 15 अगस्त की रात सांचौर से लौट रहे पूर्व सरपंच से होटल के पास लिफ्ट मांगी। गाड़ी में बैठते ही महिला ने सुनसान जगह गाड़ी रुकवाई, जहां पहले से घात लगाए बैठे बदमाशों ने पूर्व सरपंच को गनपॉइंट पर ले लिया। कपड़े उतारकर नग्न वीडियो बनाया, मारपीट की और 50 लाख रुपए की रंगदारी मांगने के साथ ही अगला चुनाव नहीं लड़ने की धमकी दी। बदमाशों ने नकद 83 हजार रुपए, 1.73 लाख ऑनलाइन ट्रांसफर व हस्ताक्षरित चेकबुक छीन ली।
सदर थाना पुलिस ने धोरीमन्ना की पुष्पा विश्नोई और उसके साथी प्रकाश जाट को गिरफ्तार किया। महिला सोशल मीडिया पर एसयूवी गाड़ियों के साथ स्टंट की रील्स डालकर रईस युवाओं को आकर्षित करती थी। 20 अगस्त को पुष्पा ने किराए पर गाड़ी लेने के बहाने धोरीमन्ना के एक युवक को बुलाया और सुनसान इलाके में साथियों संग मिलकर उसका अपहरण कर लिया। नग्न वीडियो बनाकर पीड़ित की मां से 20 लाख रुपए की फिरौती मांगी गई। हालांकि, पीड़ित मौका पाकर गाड़ी से कूदकर भाग निकला और अपनी जान बचाई।
प्रोफाइल की रेकी: गिरोह सबसे पहले सोशल मीडिया पर महंगी गाड़ियों, गहनों और दबदबे वाले युवकों, नेताओं को चिन्हित करता है।
सोशल इंजीनियरिंग: मीठी बातों और रील्स के जरिए विश्वास जीता जाता है, फिर पार्टी या लिफ्ट के बहाने एकांत में बुलाया जाता है।
गनपॉइंट पर वीडियो: गिरोह के पुरुष साथी अचानक हमला कर पीड़ित के कपड़े उतारकर वीडियो बना लेते हैं, जिससे पीड़ित लोक-लाज के डर से पुलिस के पास न जा सके।
नकली पुलिस का डर: पीड़ित और उसके परिजन को डराने के लिए आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी या कांस्टेबल बताकर एफआइआर व दुष्कर्म के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देते हैं।
अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट से सावधान: सोशल मीडिया पर अनजान महिलाओं या मॉडल्स की अचानक आई फ्रेंड रिक्वेस्ट या मैसेज से सतर्क रहें।
अकेले मिलने जाने से बचें: सोशल मीडिया पर बनी किसी नई पहचान की महिला के कहने पर रात के समय या सुनसान इलाकों में अकेले मिलने न जाएं।
डिजिटल फुटप्रिंट पर नजर: अपनी व्यक्तिगत संपत्ति, महंगी गाड़ियों और लोकेशन की लगातार लाइव अपडेट्स पोस्ट करने से बचें, यह अपराधियों को आमंत्रित करता है।
चुप न रहें: यदि कोई फोटो,वीडियो के नाम पर ब्लैकमेल करे तो लोक-लाज के डर से पैसे देने के बजाय तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर रिपोर्ट दर्ज कराएं।