- मांझा काट न दे फिर जिंदगी, पतंग लूट न ले प्राण - मकर सक्रांति को लेकर सजे बाजार
बाड़मेर.चाईनीज मांझा प्रतिबंधित है और इसको बाजार में नहीं आना चाहिए। पिछले साल भी तमाम प्रतिबंध के बावजूद प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे पाया और शहर का एक मासूम जिंदगी से हाथ धो बैठा। पतंग लूटते-लूटते मांझे ने उसकी जिंदगी काट दी और ग्यारह वर्ष के मासूम की मौत हो गई। तब चाईनीज मांझे को लेकर कार्यवाही हुई लेकिन इस साल फिर मकर संक्रांति पर आसमान में पतंगे उडऩे लगी है और मासूम हाथों में खतरनाक चाईनीज मांझे की डोर है। मांझा बेचने वालांे को किसी का डर नहीं क्योंकि यहां कोई पूछने वाला नहीं।
मकर सक्रांति का पर्व नजदीक आते ही बाजार में पतंगों की दुकाने सजने लगी हैं। अलग अलग वैरायटी के साथ में दुकानदार देशी मांझा बताकर चाइनीज मांझा बेच रहे हैं। न्यायलय की रोक के बाद भी बाजार में धड्डले से इसको बेचा जा रहा हैं।
देशी के नाम पर बेच रहे चाइना मांझा
शहर में कई स्थानों पर पंतगों के साथ चाइना का मांझा बेच रहे है। कम लागत व दिखने में आकर्षक होने के कारण अधिकांश लोग चाइना मांझे को खरीद रहे हैं। वहीं दुकानदार अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में इसको बिना किसी भय के बेच रहे हैं।
पूर्व में हो चुके है हादसे
पतंग उड़ाने के दौरान चाइनीज मांझे का प्रयोग करने से कई बेजुबान पक्षी इससे मर जाते हैं। वहीं पतंग कटने के दौरान मांझा लूटने के दौरान जख्मी होते हैं। कई बार वाहन चालक इस मांझे से उलझ कर चोटिल होते हैं। पूर्व में कई बार हादसा होने के बाद भी बाजार में यह आसानी से बिक रहा हैं।
खतरनाक हो सकता है मांझा
अन्य मांझों के बजाय प्लास्टिक की बारिक डोर पर कांच का कोट लगाया जाता हैं। इसको खींचने के दौरान अंगुलिया कट सकती हैं। इस मांझे को तोडऩा तक मुश्किल होता हैं। तेज प्रवाह से शरीर को छूता हुआ निकले तो त्वचा कट जाती हैं। मांझे के प्रयोग से बच्चों के लिए हर समय खतरा मंडराता रहता हैं।
प्रशासनिक कार्रवाही ना के बराबर
न्यायलय की रोक क े बाद भी बाजार में चाइनीज मांझे की बिक्री हो रही हैं। इसके बाद भी प्रशासन की ओर से दुकानदारों के खिलाफ कोई कार्रवाही नहीं की जा रही हैं।