बाड़मेर

योजना में देरी नही बुझ रही प्यास

- 601 करोड़ की बनी हुई है योजना - 201 गांवों के 1.39 लाख की आबादी होनी है लाभान्वित- 2013 में शुरू किया गया था काम
2 min read
Delay in planning, not extinguished thirst
Delay in planning, not extinguished thirst

- 601 करोड़ की बनी हुई है योजना

- 201 गांवों के 1.39 लाख की आबादी होनी है लाभान्वित
- 2013 में शुरू किया गया था काम

- 2017 में होनी थी पूरी
- 2020 में अब पूरा करने का दावा

- 20 करोड़ 70 लाख का फर्म को काम देरी से होने का लगा है जुर्माना

बाड़मेर. भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे शिव व रामसर क्षेत्र के 201 गांवों के करीब डेढ़ लाख लोग इस भीषण गर्मी में पानी के लिए केवल इसलिए भटक रहे है कि इनके लिए बनी 601 करोड़ की योजना समय पर पूरी नहीं हुई है। संबंधित फर्म पर 20 करोड़ 70 लाख का जुर्माना हो चुका है। फर्म तो मंथर है ही सरकारी विभाग भी रोड़ा अटकाए हुए है। 2018 में पहुंचने वाले पानी के लिए अब 2020 का लक्ष्य रखा गया है। दो साल योजना के आगे बढऩे का खामियाजा बॉर्डर को प्यास के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

यह थी योजना

वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर शिव व रामसर तसहसील के 201 गांवों की 1.39 लाख की आबादी के वास्ते 601 करोड़ की पेयजल योजना बनी। नर्मदा नहर के धोरीमन्ना तक आ चुके पानी को आगे इन गांवों में पहुंचाने के लिए 2013 में योजना पर काम शुरू हो गया और 42 महीने में कार्य पूरा होना था। रामसर में 32 और गडरारोड़ में 54 हौदियों का निर्माण कर पानी की आपूर्ति होनी थी। 2041 के लक्ष्य से बन रही इस योजना में 3.56 लाख लोगों की प्यास बुझना तय था।

अटका दी योजना

- जिन क्षेत्रों में पेयजल योजना बनी है वहां राष्ट्रीय मरूउद्यान (डीएनपी )का इलाका है, वन विभाग से अनुमति नहीं मिली है

- धोरीमन्ना से आगे राष्ट्रीय राजमार्ग को क्रास करना है। इसके लिए एनएचएआई ने अनुमति देने में लंबा समय लिया, अब अनुमति मिली है।

- संबंधित फर्म ने काम को देरी से किया। 20 करोड़ 70 लाख का जुर्माना भी लगा दिया लेकिन काम की गति मंथर है

सीसुब को भी इंतजार- इन गांवों से सीमा सुरक्षा बल की चौकियां जुड़ी है। यहां पेयजल की किल्लत है। नर्मदा की इस योजना के पूरा होने पर सीमा सुरक्षा बल का भी पेयजल संकट खत्म होना था।

अब यह स्थिति-

सीमावर्ती गांवों में पेयजल संकट से लोग जूंझ रहे है। करीब ढाई सौ गांवों में टैंकर से दो माह के लिए जलापूर्ति हो रही है जो पूरी नहीं पहुंच रही। ग्रामीण पांच से सात किलोमीटर दूर से पानी ला रहे है। पशुधन के लिए पानी का प्रबंध मुश्किल हो गया है। विभागीय अधिकारी यही कहकर पल्ला झाड़ रहे है कि नर्मदा का पानी आते ही समस्या का हल हो जाएगा।

2020 में कार्य पूरा होगा- कार्य चल रहा है। काम देरी से होने पर जुर्माना लगाया गया है। एनएचएआई की अनुमति मिल गई है। वनविभाग की भी प्रक्रिया में है।

- शंकरलाल मेघवाल, अधीक्षण अभियंता नर्मदा प्रोजेक्ट चौहटन

Published on:
10 May 2018 01:16 pm