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राजस्थान की पंचायतों में चुनावी हलचल तेज, प्रशासकों के काम से नाराज ग्रामीण; इन मुद्दों पर तय करेंगे वोट

राजस्थान में पंचायत राज चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पिछले दो सालों से प्रशासकों के भरोसे चल रही ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप रहने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। टूटी सड़कें, बंद नालियां और पेयजल संकट सबसे बड़े मुद्दे बने हुए हैं।
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बाड़मेर

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Arvind Rao

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भीखभारती गोस्वामी

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Sep 27, 2026

rajasthan panchayat polls

गडरारोड में चाय की थड़ी पर चुनावी चर्चा (पत्रिका फोटो)

-भीखभारती गोस्वामी

Rajasthan Panchayat Election 2026: गडरारोड (बाड़मेर): शहरों में नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया के बाद अब प्रदेश में पंचायतीराज चुनाव को लेकर गांव-गांव में सरगर्मी बढ़ने लगी है। लगभग दो वर्षों से प्रशासकों के भरोसे चल रही ग्राम पंचायतों में चुनावी सुगबुगाहट तेज हो गई है। आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संभावित सरपंच दावेदार गांवों में सक्रिय हो गए हैं। चौपालों, चाय की थड़ियों और सोशल मीडिया पर चुनावी चर्चाएं जोरों पर हैं।

हालांकि, इस बार खास बात यह है कि दावेदारों से ज्यादा आम ग्रामीणों को चुनाव का इंतजार है। ग्रामीणों का मानना है कि प्रशासक काल में विकास कार्य कागजों तक ही सीमित रहे। अब चुनी हुई पंचायत से उन्हें गांव की सूरत बदलने की उम्मीद है।

ठप पड़े विकास कार्यों से नाराजगी

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले डेढ़-दो वर्षों में विकास कार्य अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पाए। गलियों में टूटी सड़कें, बंद नालियां, अधूरी पेयजल योजनाएं और सफाई व्यवस्था की बदहाल स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। ऐसे में इस बार चुनाव में विकास ही सबसे बड़ा मुद्दा रहने वाला है। वरिष्ठ ग्रामीणों का कहना है कि पहले सरपंच गांव में ही रहता था, सुख-दुख में साथ खड़ा रहता था। प्रशासक व्यवस्था में सुनवाई नहीं हुई। अब लोग ऐसा प्रतिनिधि चुनना चाहते हैं, जो गांव में उपलब्ध रहे और काम करवाए।

पानी निकासी सबसे बड़ी समस्या

उपखंड क्षेत्र के गडरारोड कस्बे सहित आसपास के कई गांवों में बरसात और घरेलू गंदे पानी की निकासी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। अधिकांश मोहल्लों और गलियों में पक्की नालियां नहीं हैं और जहां बनी हुई हैं, वहां साफ-सफाई और रखरखाव के अभाव में वे अवरुद्ध पड़ी हैं। बारिश के दिनों में गलियों में घुटनों तक पानी भर जाता है। कीचड़ से आवागमन मुश्किल हो जाता है। गंदा पानी घरों के आगे जमा रहने से बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में नाली निर्माण का वादा होता है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं होता।

सफाई और पेयजल पर भी उठ रहे सवाल

गांवों में ठोस कचरा प्रबंधन और नियमित सफाई व्यवस्था अब तक मजबूत नहीं हो पाई है। गांव के प्रवेश मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं।

वहीं, हर घर नल से जल का सपना भी क्षेत्र के कई गांवों में अधूरा है। ग्रामीणों को आज भी पारंपरिक तालाब, बेरियों और टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। गर्मी के दिनों में पेयजल संकट गहरा जाता है। विशेषकर पशुपालकों के समक्ष पानी की बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है, क्योंकि इस सीमावर्ती क्षेत्र में पशुपालन ही आजीविका का मुख्य आधार है।

खस्ताहाल सड़कें बढ़ा रही परेशानी

उपखंड क्षेत्र के कई गांवों और ढाणियों को जोड़ने वाली सड़कों की हालत अत्यंत जर्जर है। वर्षों पूर्व बनी सड़कों की समय पर मरम्मत नहीं होने से उनमें बड़े-बड़े गड्ढे पड़ गए हैं। इससे आए दिन बाइक सवार चोटिल हो रहे हैं, वहीं बरसात में इन रास्तों पर चलना जोखिम भरा हो जाता है। ग्रामीणों की मांग है कि गांव से गांव को जोड़ने वाली सड़कों का नवीनीकरण प्राथमिकता से हो। साथ ही सरकारी स्कूलों में विषय अध्यापकों की कमी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, उप स्वास्थ्य केंद्रों पर जरूरी सुविधाओं की पूर्ति की जाए।