
पोकरण. इस वर्ष क्षेत्र में भीषण अकाल के हालात बने हुए है। पोकरण क्षेत्र में बारिश नहीं के बराबर हुई है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में चारे-पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। इन हालातों में प्रशासन की पहल पर भामाशाहों ने आगे आकर गांवों में तालाबों में नलकूप खुदवाने के साथ पशुकुंड बनाए है, ताकि गोवंश व मवेशी को राहत मिल सके। गौरतलब है कि इस वर्ष क्षेत्र में बारिश की कमी के कारण अनावृष्टि के हालात बने हुए है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित तालाबों व नाडियों में पानी सूख चुका है। जिसके कारण मवेशी व गोवंश पानी के लिए दर-दर भटक रहे है। पशुपालकों के लिए भी मवेशी के लिए पानी की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। इसी को लेकर प्रशासन की ओर से भामाशाहों से संपर्क कर तालाबों पर नलकूप खुदवाकर उन पर सौर ऊर्जा सिस्टम लगवाने और पशुकुंड बनाकर मवेशी के लिए पेयजल की व्यवस्था करने की पहल की जा रही है।
जिला कलक्टर अनुपमा जोरवाल के निर्देशन में तहसीलदार प्रीतमसिंह भुरटिया ने क्षेत्र में भामाशाहों से संपर्क किया गया। तहसीलदार भुरटिया की प्रेरणा से मोडरडी व गुड्डी गांव में दो भामाशाह तैयार हुए। क्षेत्र के मोडरडी निवासी वीरेन्द्रसिंह राठौड़ की ओर से गांव की गवाई नाडी पर नलकूप खुदवाया गया। यहां भू-गर्भ में पर्याप्त पानी उपलब्ध है। ऐसे में नलकूप खुदवाकर यहां सोलर पैनल व बूस्टर लगाया जाएगा और बड़ा पशुकुंड निर्माण करवाया जा रहा है। इसके बाद स्वचलित मशीन लगाई जाएगी, ताकि मवेशी व गोवंश को राहत मिल सकेगी। इसी प्रकार क्षेत्र के गुड्डी गांव में पूर्व सरपंच मोहनसिंह राठौड़, दीपसिंह व चतुरसिंह आदि की ओर से भी गांव के तालाब पर नलकूप खुदवाकर पशुकुंड बनाया गया है। यहां दिन-रात मवेशियों व गोवंश की भीड़ देखी जा सकती है।
पोकरण. इस वर्ष क्षेत्र में अनावृष्टि के कारण भीषण अकाल के हालात उत्पन्न हो गए है। जिसके कारण बेसहारा पशु काल का ग्रास हो रहे है। पशुपालकों के लिए अपने मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। जिलेभर में चारे की भयंकर कमी है। ऐसे में सुदूर जिलों से चारा मंगवाया जा रहा है। पंजाब के सीमावर्ती जिलों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में मालवाहक गाडिय़ों में चारा भरकर यहां पहुंचाया जा रहा है। जिससे दिन-रात ऐसे वाहनों की रेलमपेल नजर आ रही है। सरकार की ओर से अभी तक चारा डिपो व पशु शिविर शुरू नहीं किए जाने के कारण पशुपालकों के लिए महंगे दामों में चारा मंगवाना मुश्किल हो रहा है। कामधेनु सेना के खेतोलाई ग्राम प्रभारी नीम्बाराम विश्नोई ने बताया कि कई गांवों में पशुपालकों को निजी स्तर पर टैंकर मंगवाकर पशुओं की प्यास बुझानी पड़ रही है। पशुपालकों का कहना है कि समय रहते पशु खेलियों, कुंडों और टांकों को नियमित भरने की व्यवस्था नहीं हुई तो संकट और गहरा सकता है।