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अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन मुनाबाव
आमने-सामने राजा भोज और गंगू तेली
भीख भारती गोस्वामी
गडरारोड . भारत-पाक सीमा के अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन पर एक ही जगह राजा भोज और गंगू तेली की कहावत सार्थक हो रही है। मुनाबाव रेलवे स्टेशन के अंतरराष्ट्रीय प्लेटफ ार्म पर पाकिस्तान आने-जाने वालों को गर्म समोसे, मीठा पानी और वातानुकूलित माहौल की सुविधाएं मिल रही हैं तो दस कदम दूरी पर दूसरे प्लेटफ ार्म पर साधारण रेल के यात्रियों को पीने को पानी के लिए भी तरसना पड़ रहा है। लगभग 12 वर्ष पूर्व थार एक्सप्रेस के संचालन के वक्त दोनों का ख्याल रखा गया था और इस प्लेटफ ार्म को भी दुल्हन की तरह सजाया गया था लेकिन अब यह दुर्दशा के आंसू बहा रहा है।
भारत-पाक के बीच थार एक्सपे्रस के संचालन के लिए मुनाबाव रेलवे स्टेशन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं जुटाई गई र्हं। वहां थार एक्सप्रेस से आने-जाने वाले भारत-पाक यात्रियों की इमीग्रेशन, कस्टम व अन्य जांच होती है। लगभग 12 साल पहले 2006 में थार एक्सप्रेस का संचालन यहां से शुरू हुआ तो मुनाबाव रेलवे स्टेशन पर ही एक अलग से प्लेटफ ार्म का निर्माण हुआ जो थार एक्सप्रेस के लिए है। इस आधुनिक वातानुकूलित प्लेटफार्म पर यात्रियों के लिए मीठा पानी के वाटर कूलर, बैठने को सोफे और बैंच, कैंटीन , चिकित्सा व अन्य सुविधाएं हैं।
यहां पर भी किया था बदलाव
थार एक्सप्रेस प्रारंभ हुई तो पूरे स्टेशन को ही दुल्हन की तरह सजाया और रेलवे स्टेशन के बाहर पार्क, सजावट को पत्थर, दो विशेष कक्ष , बैंच, पानी की सुविधा की गई। जिससे पूरा रेलवे स्टेशन ही बदला हुआ नजर आने लगा।
बीएसएफ का है जुड़ाव
सीमावर्ती क्षेत्र के गांवों सहित बीएसएफ के जवान भी साधारण रेल से सफर करते हैं। ऐसे में यहां पर उनके लिए सुविधा नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अब एक राजा भोज, दूजा गंगू तेली
अब थार एक्सप्रेस जहां रुकती है उस प्लेटफ ार्म पर तो तमाम सुविधाएं हैं लेकिन जहां साधारण रेल रुकती है और स्टेशन है,वहां हालात बदतर हो गए हैं। बाहर पार्क उजड़ गया है। आकर्षण को लगाए गए पत्थर टूट गए हैं। पीने के पानी का इंतजाम नहीं है। दो विशेष प्रतीक्षालय बनाए थे जो बंद हैं। शौचालय के भी ताले लगे हुए हैं। साधारण रेल से सफ र करने वाले यात्रियों को इससे परेशानी हो रही है।