बाड़मेर

सरकारी रसोड़े ने शिक्षकों को बना दिया कर्जदार ?

- लाखों रुपए बकाया, कैसे बांटे भोजन, प्रभारी परेशान - जुलाई से नहीं मिली राशि, उधार के भरोसे चल रहा खाना

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कुक कम हैल्पर भी परेशान

बाड़मेर पत्रिका.

सरकारी रसोड़े की व्यवस्था कई संचालकों के गले की हड्डी बन गई है। क्योंकि पांच माह से पोषाहार राशि आवंटित ही नहीं हुई है। इसके चलते वे गांव से उधारी मांग कर खाना बना रहे हैं, वहीं कुक कम हेल्पर भी अल्प मानदेय को तरस रही है।
यह स्थिति जुलाई से है। इसके चलते कोई संचालक डेढ़ लाख तो कोई दो लाख का कर्जदार हो गया है।

सरकारी विद्यालयों में पढऩे वाले पहली से आठवीं तक पढऩे वाले बच्चों को स्कूल में मिड डे मील देने का नियम है। इसके लिए सरकार प्रत्येक विद्यालय की प्रबंधन समिति (एसएमसी) को राशि जारी करती है। जिले के सिणधरी ब्लॉक के 42 उच्च माध्यमिक, 21 माध्यमिक, 220 उच्च प्राथमिक एवं 418 प्राथमिक, 67 शिक्षाकर्मी
व 6 मदरसों सहित 777 विद्यालयों में पोषाहार पक रहा है। इनमें करीब 1130 कुक कम हैल्पर लगी हुई है। इनमें से उच्च माध्यमिक विद्यालयों में औसतन एक से ड़ेढ़ लाख तो अन्य में साठ-सत्तर से एक लाख रुपए की राशि का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। यह राशि जुलाई से अटकी हुई है जो करीब पचास लाख प्रति माह होती है। एेसे में पांच माह से करीब ढाई लाख रुपए मिड डे मील के अब तक नहीं मिले हैं।

कुक कम हैल्पर भी परेशान- जानकारी के अनुसार कुक कम हैल्पर को सितम्बर से मानदेय राशि नहीं मिली है। इनकी राशि हर माह बारह लाख रुपए होती है। तीन माह का यह भुगतान करीब चालीस लाख रुपए हैं, जो बकाया चल रहा है।
अभी भी आठ ब्लॉक के आधार पर भुगतान- जिले में 17 ब्लॉक हैं, लेकिन शिक्षा विभाग में आठ ब्लॉक के आधार पर ही मिड डे मील का भुगतान होता है। एेसे में सिणधरी ब्लॉक में भी सम्मिलित ब्लॉक के आधार पर भुगतान हो रहा है।

बढ़ी उधारी, साख दांव पर- गौरतलब है कि मिड डे मील के तहत पहली से पांचवीं तक के छात्रों को प्रति छात्र 4.13 रुपए व छठीं से आठवीं तक 6.18 रुपए दिए जाते हैं। इसमें अनाज को छोड़ मिर्च मसाला, तेल, सब्जी, दाल, पिसाई, ईंधन, फल आदि का खर्च देना होता है। यह सामग्री बाजार से संबंधित प्रभारी शिक्षक को लेनी होती है। पांच माह से भुगतान रुका होने पर उसके ऊपर लाख-डेढ़ लाख रुपए हो गए हैं। इसके चलते उसकी साख दांव पर लगी हुई है।
मांग के अनुरूप नहीं भुगतान- ब्लॉक हर माह मांग पत्र भेजते हैं। इसके अनुरूप भुगतान नहीं होकर हर ब्लॉक को मनमर्जी से भुगतान किया जा रहा है। बाड़मेर ब्लॉक में भुगतान की समस्या नहीं है जबकि सिणधरी ब्लॉक पांच माह से भुगतान को तरस रहा है। इसे सुधारने की जरूरत है। इस बार कम आवंटित राशि वाले ब्लॉक को अधिक राशि दी जाए।- बांकाराम सांजटा, शिक्षक नेता, राजस्थान पंचायतीराज शिक्षक संघ

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Published on:
09 Dec 2017 10:40 pm
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