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बालोतरा.
साहब को सब खबर है। यूं ही परेशान हो रहे हो। कुछ भी नहीं होगा। काम कर रहे हैं ओर ऐसे ही चलेगा। बिठूजा औद्योगिक क्षेत्र के वस्त्र कारखाना में बड़ी मात्रा में जमा बजरी के सोमवार दोपहर फोटो खींचने के दौरान यहां मौजूद श्रमिकों ने दो टूक शब्दों में यह बात कही। इससे अच्छी तरह समझा जा सकता है कि दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है। शहर, क्षेत्र में प्रभावशाली व दंबग लोग लंबे समय से बजरी का अवैध खनन व इसे बेच दोनों हाथों से पैसे बटोर रहे हैं। इस हकीकत से अच्छी तरह वाकिफ होने के बावजूद प्रशासन, खनिज व पुलिस के आला अधिकारी मुंह फेर बैठे हैं।
बजरी बंद व इसकी अधिक मांग पर अच्छी हो रही कमाईपर, यह रात में ही क्यों हो। दिन में क्यों नहीं। इसे लेकर बजरी माफिया पैसा कमाने में कोईकसर शेष नहीं छोडऩा चाहते हंै। इस पर नया तरीका इजाद करते हुए अब ये बजरी का स्टॉक कर व इसे भरवाकर दिन में भी दो- दो हाथों खूब पैसा कमा रहे हैं। इसके लिए इन्होंने बिठूजा औद्योगिक क्षेत्र के वस्त्र कारखाने इनके लिए वरदान साबित हो रहे हैं। प्रभावशाली लोगों ने कारखानों को डपिंग स्टेशन का रूप दे रखा है।
दिन में यंू करते हैं कमाई- बजरी अवैध कारोबारी रात के अंधेरे में क्षेत्र में जमकर बजरी का खनन व परिवहन कर पैसे कमाते हैं। दिन के उजाले में कार्रवाईसे बचने के लिए ये बिठूजा के कारखानों के परिसर में ट्रेक्टर ट्राली से बजरी डलवाते हैं। ऊंची चारदीवारी होने पर स्टॉक की बजरी मार्गसे गुजरने वालों को दिखाईनहीं देती है। यहां हरदम जेसीबी मशीन खड़ी रहती है। इससे ट्रक में बजरी भरने के साथ इसे प्लास्टिक तिरपाल से ढकते हैं। इसके बाद ट्रक गंतव्य स्थल की ओर रवाना होता है। बिठूजा क्षेत्र के करीब एक दर्जन भर वस्त्र कारखानों में बजरी का भारी स्टॉक इस बात का सबसे बड़ा गवाह है। लंबे समय से यह सिलसिला जारी है।
धौंसपट्टी दिखाने को लगाए बैनर- बिठूजा औद्योगिक इलाके में स्थित कारखानों में हजारों टन बजरी का अवैध स्टॉक कर रखा है। इन कारखानों के संचालकों ने अधिकारियों-कर्मचारियों को राजनैतिक रसूखात की धौंसपट्टी दिखाने में कोईकोर कसर नही छोड़ रहे है। इन कारखानों के गेट पर सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों के बैनर, पोस्टर लगा रखे है, ताकि अधिकारी कार्रवाईकरने नही आएं।
सबको खबर, प्रशासन जानबूझकर बेखर- शहर, क्षेत्र में बजरी के बड़े स्तर पर अवैध खनन, परिवहन व स्टॉक से आम से खास को खबर है। रात आठ बजे के बाद से सुबह पांच बजे तक गांव से शहर के मार्गों से गुजरते सैकड़ों ट्रक, व दिन में सड़कों से सरपट भागते ट्रेक्टरों पर हरेक वाकिफ है। जागरूक लोग समय समय पर प्रशासन को शिकायतें कर कार्रवाईकी मांग भी करते हैं। लेकिन मिलीभगत के खेल पर पुलिस के आधा अधिकारी चक्कर काट खाली हाथ वापिस लौट आते हैं। अधिक शिकायतों पर कुछ कार्रवाईकर फिर चुप बैठ जाते हैं। प्रशासन, खनिज व पुलिस के अधिकारियों के जानबूझकर बेखबर बन बैठ रहने से बजरी माफियों की मौज बन पड़ी है।
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