बाड़मेर

राजस्थान में पाकिस्तान के नजदीक इन 472 गांवों के क्या है हाल, जानिए

भारत पाकिस्तान में तनाव की स्थिति में बाड़मेर जिले के 472 गांव फिर एक बार सिपाही की भूमिका में थे। सरहद से महज 25 किमी की दूरी पर बसे इन गांवों के नसीब में जब भी पाकिस्तान से तनाव होता है युद्ध की स्थिति तो है, लेकिन 1947 के बाद लगातार ये गांव मूलभूत सुविधाओं की जंग भी लड़ रहे है।

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May 17, 2025
नैनवां। पाईबालापुरा बांध के एक नलकूप की जली मोटर को बदलने की कार्रवाई करते श्रमिक।

बाड़मेर. भारत पाकिस्तान में तनाव की स्थिति में बाड़मेर जिले के 472 गांव फिर एक बार सिपाही की भूमिका में थे। सरहद से महज 25 किमी की दूरी पर बसे इन गांवों के नसीब में जब भी पाकिस्तान से तनाव होता है युद्ध की स्थिति तो है, लेकिन 1947 के बाद लगातार ये गांव मूलभूत सुविधाओं की जंग भी लड़ रहे है। केन्द्र सरकार की महत्ती वाइब्रेेंट विलेज योजना से भी ये गांव वंचित है, जबकि उत्तर भारत के गांवों में सरहद के गांवों को यह योजना कायाकल्प कर रही है।

सीमावर्ती बाड़मेर जिले की शिव, रामसर, गडरारोड़, चौहटन और सेड़वा इलाके के इन गांवों में पानी की पीड़ा आज भी भारी है। अकली गांव के भारथाराम कहते है कि 77 साल बाद भी पेयजल की समस्या का समाधान नहीं हुआ है। नर्मदा नहर का पानी आने का सपना 2008 से देख रहे है, लेकिन पानी दूर की कौड़ी है।

डीएनपी क्षेत्र के गड़स, हापिया, पनिया, बिजावल सहित एक दर्जन गांव के लोग आज भी मीलों पैदल चलकर पानी लाते है। बड़ी पंचायतों में फिर भी 12 वीं तक स्कूल है लेकिन छोटे गांवों में आज भी पांचवीं-आठवीं बाद विद्यार्थियों को 20 किमी दूर तक पढऩे को जाना पड़ता है। स्कूल है तो शिक्षक नियुक्त नहीं है। बीजावल के शैतानसिंह कहते है कि बॉर्डर के गांवों में पानी, बिजली, सड़क और चिकित्सा सभी के हाल बेहाल है। हमारा तो रोज का युद्ध इन मूलभूत सुविधाओं से है।

क्यों है यह स्थिति
बॉर्डर के इन गांवों में कर्मचारियों की अव्वल तो सरकार ने नियुक्ति ही कम की है, फिर कोई है तो वह आता नहीं है। बॉर्डर पर पर्याप्त सरकारी स्टाफ नहीं होन से सुविधाओं का विस्तार नहीं हो रहा है।

वाइब्रेंट विलेज से जोड़ें


इन गांवों के विकास के लिए पहले बीएडीपी (बॉर्डर एरिया डवलपमेंट प्रोग्राम)चल रहा था जो बंद हो गया। फिर उत्तर भारत में वाइब्रेंट विलेज योजना प्रांरभ की गई। इस योजना से बॉर्डर के इस इलाके को नहीं जोड़ा गया है। यह योजना लागू हों तो गांव-गांव में विकास हों।

ये गांव पहले है..सुविधाओं में आखिरी क्यों


प्रधानमंत्री ने बॉर्डर के इन गांवों केा आखिरी की बजाय पहला कहा है। वे कहते है कि इन गांवों में सबसे पहले सुविधा मिलनी चाहिए,लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। युद्ध की स्थिति बनते ही इन गांवों की वीर गाथाएं लिखी जाती है लेकिन इनकी तकदीर बदलने की योजनाओं से ये आज भी वंचित है। सरकार अब तनाव के तुरंत बाद स्थितियां बदलते ही इन गांवों के विकास की योजना बनाएं।- रविन्द्रङ्क्षसह भाटी, विधायक शिव

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