
पत्रिका अभियान- आओ मिलकर बचाएं एक जान
बाड़मेर पत्रिका.
दुर्लभ पोम्पे रोग से ग्रसित ललित की संवेदनाएं आम आदमी के दिल में उतरने लगी है और उसकी मदद को जुटने का सिलसिला शुरू हुआ है। 2.75 करोड़ बड़ी रकम है लेकिन इसके लिए हजारों हाथ काम करने लगे तो इतनी बड़ी भी नहीं, इसी मंशा से विभिन्न सामाजिक संगठनों,युवाओं और सोशल मीडिया ग्रुप पर लगातार अपील होने लगी है कि ललित की मदद को आगे आएं। इधर, राज्य सरकार की ओर से नि:शुल्क उपचार की बड़ी उम्मीद का इंतजार अभी भी बना हुआ है। जयपुर में उत्तरप्रदेश के एक बच्चे का इसी बीमारी में ग्रसित होने पर अनुकंपा योजना में जेकेलोन अस्पताल में उपचार चल रहा है,ललित के लिए भी यह अर्जी लगी हुई है।
पत्रिका ने सरकार सुनिए एक युवक की जिंदगी को बस आपसे आस... शीर्षक से प्रकाशित समाचार से युवक ललित व उसके परिवार की पीड़ा को सामने लाया। मुम्बई ने तीरा को दी जिंदगी, बाड़मेर से जीवन मांगे ललित शीर्षक से लगातार समाचार बाद लोग इस परिवार से जुडऩे लगे है। पत्रिका अभियान के समाचवार सुनो सरकार...बेटे की सांसों पर पहरा देकर बैठी मां की अटूट प्रार्थनाएं के साथ ही मदद करने का सिलसिला शुरू हुआ है।
बाड़मेर पुलिस अधीक्षक जुड़े
जिला पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा पत्रिका के अभियान से जुड़े है। उन्होंने पुलिसकर्मियों को आग्रह किया है कि वे युवा की मदद के लिए आगे आ सकते है। पत्रिका के अभियान ेसे खुद का जोड़ते हुए कार्य कर सकती है। उन्होंने जिक्र किया कि वकील, चिकित्सक, शिक्षक, कर्मचारी और आम लोग भी इससे जुड़ रहे है। पुलिस अधीक्षक के आह्वान बाद जिले के पुलिसकर्मियों ने ललित की मदद के लिए प्रयास प्रारंभ किए है।
जोगेन्द्रङ्क्षसह ने सवा लाख, किरी देंगे एक लाख
ललित की मदद के लिए युवा उद्यमी जोगेन्द्रङ्क्षसह चौहान ने सवा लाख रुपए पिता तनसिंह चौहान की प्रेरणा में मदद को देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि वे अपने मिलने वालों से भी आग्रह करेंगे कि ललित की यथासंभव मदद करें। उद्यमी ललित किरी ने भी ललित की मदद के लिए एक लाख रुपए देने की घोषणा करते हुए कहा कि युवक के उपचार के लिए सामाजिक संगठन और लोग आएं तो उपचार को बड़ी मदद मिलेगी।
राजकीय अस्पताल में शुरू हुई मुहिम
बाड़मेर के राजकीय अस्पताल में ललित की मदद के लिए मुहिम प्रारंभ हुई है। अबरार मोहम्मद ने बताया कि अस्पताल के चिकित्सक, पैरा मेडिकल स्टाफ, नर्सिंग स्टाफ ने व्हाअ्सएप ग्रुप के जरिए एक दूसरे को जोड़ा और सदस्यों ने अपने सामथ्र्य अनुसार मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। अस्पतालकर्मियों ने खुद मदद करने के साथ ही आगे से आगे रिश्तेदारों को भी कहा है कि वे ललित की मदद को आगे आएं।