
बालोतरा. शहर में एक दिन के अंतराल में एक ही समय पर पहले बहू व बाद में सास की मृत्यु हुई।
शहर निवासी भंवरलाल टावरी की धर्मपत्नी देवीटावरी (69) दो वर्षों से बीमार थी, जिसका लंबे समय से उपचार चल रहा था। बुधवार सुबह सात बजे उनका देहावसान हुआ। बैकुण्ठी यात्रा निकाल उनका अंतिम संस्कार किया गया।
परिवार की मुखिया व भंवरलाल टावरी की माता 94 वर्षीय इंदिरा टावरी जो स्वस्थ थी, जो बुधवार को बहु के निधन के समाचार के बाद व्याकुल हो गई। गुरुवार सुबह उन्होंने सब घर वालों को चाय पिलाई। कुछ समय बातचीत की। इसके कुछ पल बाद ही दम तोड़ लिया। अजीब संयोग रहा की दोनों ने एक ही समय सुबह सात बजे दम तोड़ा। गुरुवार को सास का अंतिम संस्कार किया। शहर में घटित इस घटना को लेकर चर्चा रही।
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पाश्चात्य संस्कृति के प्रभावों से बचाव को मातृ शक्ति ही सक्षम
चौहटन एवं ढ़ोक विद्या मंदिर में मातृ शक्ति संगम का आयोजन
चौहटन. पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते दुष्प्रभावों से बचने एवं अपने बालक-बालिकाओं को भारतीय संस्कृति की शिक्षा एवं संस्कारवान बनाने के लिए मातृ शक्ति को आगे बढ़कर भूमिका निभानी होगी।
माताएं-बहनें ही बच्चों में श्रेष्ठ संस्कारों की संवाहक हो सकती है। यह बात विद्या भारती राजस्थान के प्रान्तीय कार्यकारिणी सदस्य वासुदेव प्रजापत ने गुरुवार को चौहटन एवं ढ़ोक स्थित आदर्श विद्या मंदिर में आयोजित मातृ शक्ति संगम के मौके पर बतौर मुख्य वक्ता के रूप में कही।
उन्होंने कहा कि माता ही बालक की पहली गुरुहोती है, वह अपने बच्चों को किसी भी दिशा में ले जा सकती है। उन्होंने माता जीजाबाई का उदाहरण पेश करते हुए कहा कि उन्होंने ही संस्कारों के माध्यम से वीर शिवाजी जैसे राष्ट्रभक्त, स्वाभिमानी और वीर पुरुष का निर्माण किया।
चौहटन में आयोजित मातृ शक्ति संगम कार्यक्रम में मुख्य अतिथि व्याख्याता संगीता जाोशी एवं अध्यक्ष शांतिदेवी धारीवाल थी। ढ़ोक में प्रधानाचार्य रतनलाल सेठिया मुख्य अतिथि थे जबकि अध्यक्षता वीरातरा माता धर्मार्थ ट्रस्ट सचिव भैरसिंह ढ़ोक ने की। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ अध्यापिका शांतिदेवी थी। दोनो स्थानों पर विद्यालय स्टाफ,, प्रबन्ध समिति के सदस्य मौजूद थे।