
बाड़मेर
43 डिग्री में सूनसान थार, दोपहर 2 बजकर 57 मिनट, पालनागृह की घंटी बजती है, अस्पताल प्रशासन तत्काल दौड़ता हुआ आता है। पालनागृह में मौसूम के रोने की आवास से हर कोई चौंक जाता है। कुछ घंटों पूर्व डिलेवरी में हुआ मासूम। तत्काल उसे अस्पताल में ले जाया जाता है। अस्पताल में मौजूद मातृशक्ति मुंह में उंगली दबाने पर मजबूर हो जाती है किसी को भी समझ में नहीं आता की ऐसी कौन मां होगी। जिसने 43 डिग्री तापमान में अपने कलेजे के टूकड़े को छोड़ दिया।
बाड़मेर के राजकीय अस्पताल स्थित पालनागृह में बुधवार दोपहर को एक नवजात को कोई छोड़ गया। मनमोहन और गीता नर्स ने तुरंत ही नवजात को एसएनसीयू वार्ड में ले आए और चिकित्कस हरीश चौहान को सूचना दी। चौहान ने तुरंत की प्राथमिक उपचार किया उसके अनुसार नवजात स्वस्थ है। नजवात का वजन करीब एक किलो आठ सौ ग्राम है। नवजात की स्थिति से लग रहा था कि डिलेवरी भी घर पर कराई हुई लग रही है।
अस्पताल में चर्चा का विषय-
एसएनसीयू वार्ड के पास ही प्रसूता वार्ड बना हुआ है। जहां पर हर किसी के मुंह पर उसी मां की चर्चा हो रही है। जिसने इस मासूम को जन्म दिया। हर कोई ताज्जुब कर रहा था कि कैसी मां रही होगी जिसने ऐसी गर्मी में अपने कलेजे के टूकड़े को ऐसे छोड दिया।
डायपर और सूती कम्बल पहना कर छोड़ा-
मासूम को छोड़ते वक्त मां का कलेजा जरुर ही भर आया होगा उसने मासूम को डायपर पहनाने के साथ ही सूती कम्बल भी पहना रखी थी जिससे उसे गर्मी में पसीना ना आए।