पत्रिका अभियान- ट्रेफिक जाम से मिले निजात- ट्रेफिक में निजी व लोक परिवहन की बसें बन रही मुसीबत, समिति की बैठक में हुआ था जमीन आवंटन का निर्णय, यातायात व परिवहन महकमा कई बार नगर परिषद को लिख चुका है पत्र
बाड़मेर
शहर में यातायात व्यवस्था बदहाल है। यहां लोक परिवहन व निजी बस स्टैंड के अभाव में आए दिन यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है, लेकिन जिला मुख्यालय पर लोक परिवहन बसों के लिए स्टैंड स्थापित करने के लिए जिला यातायात प्रबंधन समिति की बैठक में लिया गया निर्णय दस माह बीतने के बावजूद भी फाईलों से बाहर नहीं आया है।
जिला मुख्यालय पर लोक परिवहन बसों के लिए स्टेण्ड निर्धारण के लिए फरवरी-2021 में हुई जिला यातायात प्रबंधन समिति की बैठक में जिला परिवहन अधिकारी ने प्रकरण उठाया। समिति ने लोक परिवहन बसों के लिए स्टैंड बाड़मेर में जोधपुर रोड़ पर हरलाल छात्रावास के पास व गडरारोड़, सांचोर व धोरीमन्ना की तरफ चौहटन चौराहे के पास 100 मीटर की परीधी छोड़कर बस स्टैंड संचालन की अस्थाई अनुमति देने का निर्णय लिया गया, लेकिन आठ माह बीतने के बावजूद यह निर्णय महज कागजी बना हुआ है।
जमीन देखी, मामला अधरझूल
समिति की बैठक में निर्णय होने के बाद जिला परिवहन विभाग व नगर परिषद के अधिकारियों ने दो चिह्ति जमीनों का मौका देखा गया, लेकिन नगर परिषद का तर्क है कि चौहटन रोड़ की जमीन पर तो स्टे है और जोधपुर रोड़ की जमीन हाईवे से सटी है। इसलिए यह जमीन तो बस स्टेण्ड के लिए नहीं दे सकते है। हालांकि नगर परिषद की पालना रिपोर्ट लंबित है।
यातायात पुलिस भी लिख चुकी है पत्र
सिणधरी चौराहा, चौहटन सर्किल पर निजी व लोकपरिवहन की बसों का यातायात दबाव होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसको लेकर यातायात पुलिस कई बार परिवहन विभाग व नगर परिषद को पत्र भी लिख चुकी है, लेकिन दोनों विभाग यातायात व्यवस्था को लेकर बेफिक्र है। ऐसे में शहर में यातायात व्यवस्था सुधरने का नाम ही नहीं ले रही है।
- पालना रिपोर्ट लंबित है
शहर के जोधपुर रोड़ व चौहटन सर्किल के पास अस्थाई बस स्टैंड संचालन को लेकर गत बैठक में निर्णय हुआ था, मौका भी देखा गया है, लेकिन नगर परिषद की पालना रिपोर्ट लंबित है।- संजीव चौधरी, जिला परिवहन अधिकारी, बाड़मेर
- एक जमीन पर स्टे तो हाईवे पर
चौहटन चौराहे के पास वाली जमीन पर स्टे है और जोधपुर रोड़ मार्ग की जमीन हाईवे पर है, उसे अस्थाई दे सकते है। लेकिन दोनों मामले अधरझूल है।- दिलीप पूनिया, आयुक्त, नगर परिषद, बाड़मेर
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