बाड़मेर

थार की धरती में तेल, जमीन पर हरियाली,जानिए पूरी खबर

- धोरों की तस्वीर बदल रही है-

2 min read
Dec 28, 2017
oil In the land of Thar Greenery on the ground

बाड़मेर.थार रेगिस्तान में 2002 आए भूकंप बाद तेल का खजाना निकला तो 2006 की बाढ़ ने यहां कवास इलाके में भूमिगत जल स्तर को भी ऊंचा किया है। नतीजतन अब भूगर्भ में तेल का खजाना और ऊपर बाडि़यां और खेती होने से हरियाली नजर आने लगी है। रेगिस्तान के इस इलाके में अब गेहूं, रायड़ा, सरसों के साथ बैर, गूंदा और अन्य पौधों लहलहाने लगे है।

ये भी पढ़ें

खेल हमें आगे बढऩे की देते हैं प्रेरणा

जिले के बायतु से गुड़ामालानी तक तेल का खजाना है। यहां 39 तेल क्षेत्र में 250 से ज्यादा तेल कुओं में पेट्रोलियम का अथाह खजाना मिला है। इस तेल के खजाने के बूते ही थार ने आर्थिक तरक्की की है। अब यहां एक ओर बदलाव इसी खजाने में देखने को मिल रहा है। 2006 की बाढ़ बाद यहां बाटाडू, सवाऊ पदमरङ्क्षसह, कवास, भाडाखा से लेकर गुड़ामालानी तक के करीब 57 गांवों में भूमिगत जल स्तर में वृद्धि हुई है। इसको लेकर यहां पर बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से लोगों ने विभिन्न कृषि तकनीकी मदद लेते हुए खेतों में गूंदे, बैर और अनार की खेती तो की है। इसके अलावा 200 के करीब खड़ीन(एनिकट ) का निर्माण भी हुआ है जो बरसाती पानी को रोककर खेती में सहायक हो रहे है। इससे यहां पर सरसों, गेहूं व अन्य फसलें होने लगी है। इस बदलाव ने सैकड़ों खेतों में हरियाली ला दी है।

कुओं का खनन भी होने लगा- तेल कुओं के इस क्षेत्र में लोगों ने भी अब अपने कृषि कुएं बना लिए है जहां पर वे खेती को बढ़ावा देने लगे है। ये कुएं डेढ़ सौ से दो सौ फीट तक गहरे है। इनके नीचे भले ही तेल का खजाना हों लेकिन यहां पर पानी मिल जाने के बाद कृषि की जाने लगी है।

धोरों की तस्वीर बदल रही है- धोरा धरती में जहां रेत के टीलों को रोकने के लिए दो दशक पहले सरकार को टिब्बा स्थरीकरण और वनविभाग की ओर से अन्य योजनाएं चलाकर यहां केवल बबूल लगाकर रेत को रोका जा रहा था अब आलम यह है कि बबूल को अब यहां बोना भी मना हो गया है। बबूल को रेगिस्तान की हरियाली के लिए नुकसानदायक मानते हुए अब यहां नीम, सरेस, खेजड़ी और अन्य कई प्रकार के पौधे बोए जाने लगे है।

तेल का खजाना सरकारी, हरियाली का खजाना खुद का- तेल का खजाना तो अब सरकारी हो गया है,लेकिन हरियाली का खजाना किसानों का खुद का है। वे अपने खेत में फसल बोकर और पेड़ लगाकर अपनी आमदनी प्राप्त कर रहे है। अनार और बैर की खेती से उनको संबल भी मिलने लगा है।

बदला है पूरा क्षेत्र- रेगिस्तान के इस इलाके में इतना बदलाव आया है जो कल्पनातीत है। दो दशक में तेल के खजाने के साथ यहां पर हरियाली क्षेत्र भी बढ़ा है। इससे किसानों की आदमनी बढ़ी है। किसान भी अब उन्नत तकनीक को अपनाने लगे है।- डा. प्रदीप पगारियां, कृषि वैज्ञानिक

ये भी पढ़ें

जप, तप और त्याग को अपनाएं
Published on:
28 Dec 2017 11:24 am
Also Read
View All