- बाड़मेर में एक हजार गांव-ढाणियों में केवल 2 महीने टैंकर से जलापूर्ति - 10 लीटर प्रति व्यक्ति ही रोजाना मिलेगा पानी
बाड़मेर. जिले के एक हजार गांव-ढाणियों में दो महीने ही सरकार पानी की आपूर्ति करेगी। वो भी एक व्यक्ति के लिए महज दस लीटर। यह भी इसलिए कि यहां सितंबर में अकाल घोषित हो चुका है और पानी की कोई सरकारी व्यवस्था नहीं है। शेष दस महीने बारिश होती है तो ठीक नहीं तो सबकुछ भगवान भरोसे। इक्कीसवीं सदी में संसाधन और सुविधाओं की कोई कमी नहीं है फिर भी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे गांवों की यह स्थिति है। अधिकारी इसके लिए वर्षों पहले बने आपदा प्रबंधन के नियमों का हवाला देते हैं।
बाड़मेर-जैसलमेर जिलों में दस साल में औसतन सात साल अकाल पड़ता है। वर्ष 1985 में यहां अकाल के दिनों में टैंकर से जलापूर्ति की व्यवस्था शुरू हुई। लगभग 33 साल बाद भी वही स्थिति है। जिले में टैंकर से जलापूर्ति अकाल प्रभावित गांवों में ही होती है। उन गांवोंं में महज दस लीटर पानी प्रति व्यक्ति उपलब्ध होता है। यह टैंकर मई माह में प्रारंभ होते है और जुलाई में बारिश होते ही बंद कर दिए जाते हैं।
यह कैसा गणित
जुलाई-अगस्त में बारिश नहीं हो तो सरकार मान लेती है कि अकाल हो गया और अक्टूबर की गिरदावरी रिपोर्ट इसका खुलासा कर देती है। इस साल भी करीब 2711 गांवों में अकाल है। गत जुलाई के बाद से ही इन गांवों में पानी नहीं है लेकिन सरकार प्यास बुझाने की बजाय नियमों से बंधी है।
मीलों सफर और महंगा पानी
प्रभावित गांवों में पानी की किल्लत है। आठ माह हो गए हैं। अभी टैंकर प्रारंभ नहीं किए हैं। अगले माह से केवल दस लीटर पानी प्रति व्यक्ति दिया जाएगा। गांवों में लोगों के पास पशुधन भी है। यह पानी पर्याप्त नहीं है पर क्या करें सरकार में कोई सुनवाई नहीं होती।
- बलवीरसिंह, निवासी बीजावल
दो महीने ही पानी दिया जाएगा तो सरकार बताए कि शेष दिनों में क्या होगा? आजादी के बाद से यदि पानी का प्रबंध भी गांव-ढाणी तक नहीं हुआ है तो सरकार से क्या उम्मीद करेंगे। एक दिन के लिए दस लीटर पानी पर्याप्त है क्या?
- डूंगरसिंह, निवासी गोरडि़या
यह तो राज्य स्तर का निर्णय
यह नियम और निर्णय राज्य स्तर के हैं। मई माह में टैंकर से आपूर्ति करेंगे। गडरारोड के 56 और रामसर के 52 प्वाइंट हैं जहां टैंकरों से आपूर्ति होगी।
- अंकित सारस्वत, सहायक अभियंता जलदाय विभाग गडरारोड बाड़मेर