बाड़मेर

PM मोदी के राजस्थान दौरे पर ‘प्लांटेशन कॉन्ट्रोवर्सी’, पौधरोपण की तस्वीरों पर विरोधी हमलावर- BJP खामोश

PM Narendra Modi के Pachpadra Refinery दौरे पर किए गए पौधरोपण को लेकर नया विवाद छिड़ गया है। विपक्ष का आरोप है कि Peepal के पौधे को Khejri बताया गया है।
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Jul 05, 2026
PM Modi Rajasthan Visit Controversy Over Peepal Khejri Plantation in Pachpadra
पौधरोपण करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में ₹1.06 लाख करोड़ की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने पहुंचे थे, लेकिन इस भव्य कार्यक्रम के दौरान उनके द्वारा किए गए पौधरोपण को लेकर अब एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद की मुख्य वजह पौधे की गलत पहचान और दावों में विरोधाभास होना है, जिसने मरुधरा की संवेदनशील पर्यावरण संस्कृति और स्थानीय भावनाओं को छू लिया है। विपक्ष और स्थानीय पर्यावरणविदों का दावा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने वास्तव में कार्यक्रम स्थल पर 'पीपल' का पौधा लगाया था, लेकिन उनके आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स और मुख्य भाषण में इसे राजस्थान का राज्य वृक्ष यानी 'खेजड़ी' बता दिया गया, जिसके बाद से इस मानवीय चूक को लेकर राजस्थान की राजनीति का पारा गरमा गया है।

ये वायरल पोस्ट विवाद की जड़

वायरल पोस्ट

विवाद की असली वजह- पीपल के पौधे को खेजड़ी बताना

इस पूरे घटनाक्रम के बाद जब पचपदरा रिफाइनरी परिसर से प्रधानमंत्री मोदी के पौधरोपण की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर आधिकारिक तौर पर पोस्ट किए गए, तो राजस्थान के स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने तुरंत इस पर ध्यान दिया। वीडियो और तस्वीरों को करीब से देखने पर साफ पता चला कि रोपा गया पौधा 'पीपल' का है। विवाद तब और बढ़ गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से दिए अपने मुख्य भाषण में स्पष्ट रूप से कहा था, "आज मुझे 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत खेजड़ी का पौधा लगाने का सौभाग्य मिला है... मैं जानता हूं राजस्थान में खेजड़ी का क्या महत्व है।"

विरोधियों के तीखे तंज, संस्कृति के ज्ञान पर उठाए सवाल

इस मुद्दे को लेकर विरोधियों ने तंज कसते हुए लिखा कि जो लोग अपनी संस्कृति, मरुस्थल की परंपराओं और यहां पूजनीय पीपल व खेजड़ी जैसे पवित्र वृक्षों के बीच की बुनियादी पहचान तक नहीं कर पाते, वे देश और प्रदेश की संस्कृति की रक्षा करने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं।

विपक्ष का यह भी कहना है कि यह पूरी घटना इस बात का पुख्ता सबूत है कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार मरुस्थल की जमीनी हकीकत, यहां के पारंपरिक जनजीवन और स्थानीय पर्यावरण की समझ से पूरी तरह कटी हुई है।

क्या खेजड़ी की नई किस्म का आविष्कार किया है? : बेनीवाल


प्रधानमंत्री जी क्या ये पौधा आपकी नजर में खेजड़ी है? : हरीश चौधरी

क्या सरकार ने खेजड़ी की नई किस्म विकसित कर ली?: संजना जाटव

प्रधानमंत्री जी, क्या आपकी नज़र में यह पौधा वास्तव में खेजड़ी है? : विनोद जाखड़


यह भूल नहीं, राजस्थान की पहचान के प्रति खिलवाड़ है : अभिषेक चौधरी


खेजड़ी और पीपल में फर्क तो पता नहीं : निर्मल चौधरी

राजस्थान की भोली जनता तो नासमझ है! : हेम सिंह

पीपल का पेड़ लगाकर खेजड़ी बताया : मनीष मिर्धा

अधिकारियों की लापरवाही और ब्रीफिंग पर उठे सवाल

इस तकनीकी और तथ्यात्मक गलती को लेकर विपक्ष ने सीधे तौर पर स्थानीय जिला प्रशासन और रिफाइनरी के शीर्ष अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि पचपदरा रिफाइनरी के अधिकारियों या वीवीआईपी (VVIP) इवेंट मैनेजमेंट टीम ने बेहद लापरवाही दिखाई। उन्होंने प्रधानमंत्री के हाथों पीपल का पौधा लगवा दिया, लेकिन उन्हें दी गई ब्रीफिंग फाइलों और कागजों में इसे राजस्थान का गौरव 'खेजड़ी' लिखकर दे दिया।

इसी गलत जानकारी के आधार पर पीएम मोदी ने अपने लाइव भाषण में भी इसका जिक्र कर दिया और बाद में सोशल मीडिया टीम ने भी वही तथ्य पोस्ट कर दिए।

मामले पर क्यों मौन है बीजेपी?

Rajasthan BJP Flag

पचपदरा में हुए इस पौधरोपण विवाद पर वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश संगठन और स्थानीय प्रशासन ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि यह मामला सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक भाषण और उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स से जुड़ा हुआ है, इसलिए पार्टी का कोई भी नेता या प्रवक्ता इस मानवीय भूल पर खुलकर सफाई देने या बयान जारी करने की स्थिति में नहीं है। गलती स्वीकार करने का संकट पार्टी के सामने खड़ा हो गया है।

अधिकारियों पर ठीकरा, सार्वजनिक बयान से बनाई दूरी

बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेता इस गंभीर तकनीकी चूक के लिए उन सरकारी अधिकारियों और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े लोगों को पूरी तरह जिम्मेदार मान रहे हैं जिन्होंने वीवीआईपी प्लांटेशन के लिए पौधों की व्यवस्था की थी और प्रोटोकॉल फाइल्स तैयार की थीं।

हालांकि, पार्टी के नेताओं को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे इस संवेदनशील और स्थानीय भावनाओं से जुड़े मुद्दे पर किसी भी तरह की सार्वजनिक बयानबाजी न करें, ताकि इस विवाद को और अधिक तूल पकड़ने से रोका जा सके। फिलहाल, राजस्थान के सोशल मीडिया स्पेस में पीपल बनाम खेजड़ी की यह बहस लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।

Updated on:
05 Jul 2026 10:03 am
Published on:
05 Jul 2026 09:53 am