
PM Narendra Modi (Photo: @narendramodi)
PM Narendra Modi Balotra Speech: बालोतरा: चुनौतियां चाहे वैश्विक हों या घरेलू…21वीं सदी के नए भारत की इच्छा-शक्ति उनके आगे घुटने नहीं टेकती। पचपदरा में शनिवार को 1 लाख 5 हजार करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा जोर इसी ‘संकट से समाधान’ वाले आत्मनिर्भर भारत के संकल्प पर रहा।
पीएम मोदी के करीब 30 मिनट के संबोधन में ऊर्जा, उद्योग, पर्यटन, पर्यावरण और पानी पर फोकस रहा। राजस्थान के भविष्य के विकास का रोडमैप बताने के साथ-साथ राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश भी दिए। उन्होंने न केवल राजस्थान को देश के औद्योगिक विकास का नया ग्रोथ इंजन घोषित किया, बल्कि अपनी सरकार की ‘रिफाइनरी डिप्लोमेसी’ का रिपोर्ट कार्ड भी देश के सामने रख दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में सबसे ज्यादा जोर वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान भारत के सामर्थ्य पर दिया। पीएम ने साफ किया कि पश्चिम एशिया के युद्ध संकट के बावजूद भारत ने अपनी डिप्लोमेटिक पावर का लोहा मनवाया।
आयात का दायरा बढ़ाया: युद्ध से पहले भारत जहां महज 25-26 देशों से ईंधन आयात करता था, वहीं संकटकाल में भारत की प्रभावी रणनीति के कारण 40 देशों से ईंधन मंगाया जाने लगा। यह विश्व में भारत की कूटनीतिक सफलता को दर्शाता है। अप्रैल से जून के बीच पेट्रोल-डीजल से ही कंपनियों को 75 हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ। ये इतना बड़ा था कि एक नई रिफाइनरी बन जाए। ये घाटा सरकारी खजाने से भरा गया।
घरेलू मोर्चे पर सुरक्षा कवच: खाड़ी देशों से 90% एलपीजी का आयात प्रभावित होने पर रिफाइनरीज को औद्योगिक गैस की जगह रसोई गैस (एलपीजी) बनाने के निर्देश दिए गए, जिससे उत्पादन 35 हजार से बढ़कर 54 हजार मीट्रिक टन हो गया। घरेलू गैस के दाम 2 हजार रुपए तक जा सकते थे। सरकार ने इसको लेकर बेहतर मैनजमेंट किया और सिलेंडर 950 रुपए के करीब मिल रहा है। वहीं, उज्ज्वला योजना के तहत गरीबों को यह 650 रुपए से कम में दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने राजस्थान की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने विकास के काम में ‘असहयोग’ की राजनीति को विकास की सबसे बड़ी बाधा बताया। पीएम ने याद दिलाया कि 2018 से 2023 के बीच पूर्ववर्ती सरकार के नकारात्मक रवैये के कारण रिफाइनरी का काम लगभग ठप रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘डबल इंजन’ सरकारें केवल फाइलों पर शिलान्यास नहीं करतीं, बल्कि परियोजनाओं को धरातल पर उतारकर जनता को सौंपती हैं।
प्रधानमंत्री ने शेखावाटी क्षेत्र के जल संकट के स्थायी समाधान पर बात की। उन्होंने राजस्थान और हरियाणा के बीच हुए ऐतिहासिक यमुना जल समझौते को मरूधरा की प्यास बुझाने वाला ‘भविष्य का ब्लूप्रिंट’ बताया।
34 हजार करोड़ की परियोजना: मोदी ने कहा कि अब राजस्थान और हरियाणा सरकार मिलकर शेखावटी तक पानी पहुंचाएंगे। समझौते के तहत हथिनीकुंड बैराज से पानी राजस्थान लाया जाएगा। इसके लिए अंडर-ग्राउंड पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसका लाभ सीकर, चूरू, झुंझुनूं और आसपास के पूरे शेखावटी क्षेत्र के लाखों लोगों को इसका लाभ मिलने वाला है। इस परियोजना पर लगभग 34 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने कभी राजस्थान के जल-संकट को दूर करने के लिए कोई ठोस काम नहीं किया। बीजेपी क्षेत्रवाद और बंटवारे की सियासत नहीं करती। बीजेपी राष्ट्र प्रथम की भावना पर चलती है। उस समय मैं गुजरात में मुख्यमंत्री था, यहां बहन वसुंधरा मुख्यमंत्री थी। और हम दोनों ने मिलकर बिना कोई संघर्ष, बिना कोई वाद-विवाद, बिना कोई आंदोलन, बिना कोई लड़ाई, गुजरात से नर्मदा का पानी राजस्थान के साथ साझा किया।
एलपीजी का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने बताया कि भारत की जरूरत का लगभग 60% हिस्सा विदेशों से आयात होता है, और इसमें से 90% खाड़ी देशों से होर्मुज के रास्ते आता है। लेकिन युद्ध के कारण यह सप्लाई अचानक लगभग रुक गई थी।
उन्होंने कहा, आप कल्पना कर सकते हैं कि देश में कितना बड़ा हाहाकार मचने वाला था। लेकिन राजस्थान की इस धरती ने हमें चुनौतियों को चुनौती देना सिखाया है। इसलिए, संकट शुरू होते ही हमने रिफाइनरियों की ताकत पर ध्यान दिया। फैक्ट्रियों के लिए बनने वाली गैस की जगह एलपीजी बनाने के निर्देश दिए गए। सिर्फ सात दिनों के भीतर एलपीजी का उत्पादन बढ़ गया।
पहले देश में जहां 35,000 मीट्रिक टन एलपीजी बनती थी, वह संकट के दौरान बढ़कर 54,000 मीट्रिक टन हो गई। जिन रिफाइनरियों ने कभी एलपीजी नहीं बनाई थी, उन्हें भी इसके लिए तैयार किया गया। साथ ही, पाइप वाली प्राकृतिक गैस के कनेक्शन तेजी से बढ़ाए गए और कम समय में 11 लाख घरों को पीएनजी से जोड़ा गया, ताकि एलपीजी पर दबाव कम हो सके।
Updated on:
04 Jul 2026 08:03 pm
Published on:
04 Jul 2026 08:03 pm
