
रिफाइनरी का फोटो: पत्रिका
पश्चिमी राजस्थान के रेतीले धोरों से अब ऐसी चमक निकलेगी, जिसकी गूंज सात समंदर पार तक सुनाई देगी। 4 जुलाई इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह दर्ज होने जा रहा है, जब बालोतरा के पचपदरा में स्थापित हाईटेक रिफाइनरी का उद्घाटन होगा। ये केवल कंक्रीट और लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि रेगिस्तान की तकदीर बदलने वाला 'इकोनॉमिक पावरहाउस' है। राजस्थान वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल करने जा रहा है। यह परियोजना पश्चिमी राजस्थान में औद्योगिक और आर्थिक परिवर्तन की आधारशिला है।
करीब 79,459 करोड़ रुपए की लागत से विकसित यह परियोजना भारत का पहला ग्रासरूट एकीकृत रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल परिसर है। जिसे विशेष रूप से भारी और कम लागत वाले कच्चे तेल के प्रसंस्करण के लिए डिजाइन किया गया है। यह परियोजना न सिर्फ राज्य को राजस्व और रोजगार देगी, बल्कि उसे वैश्विक ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल उद्योग में एक मजबूत पहचान भी दिलाएगी।
बालोतरा के पचपदरा में स्थापित ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह पेट्रो-रसायन परिसर देश के ऊर्जा और पेट्रो-रसायन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त इस परिसर में रिफाइनिंग और पेट्रो-रसायन उत्पादन होगा। इसकी पेट्रो-रसायन क्षमता 2.4 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है। इस रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0 है और पेट्रो-रसायन उत्पादन 26 प्रतिशत से अधिक है, जो दक्षता और स्थिरता के वैश्विक मानकों के अनुरूप है। इस परियोजना से पेट्रो-रसायन आत्मनिर्भरता बढ़ने और औद्योगिक विकास की गति मिलने की उम्मीद है।
पचपदरा में देश की 23वीं रिफाइनरी स्थापित की गई है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार इन सभी रिफाइनरियों की कुल शोधन क्षमता करीब 250 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है।
वर्षों तक सरकारें बदलती रहीं, नीतियां बदलती रहीं, लेकिन राजस्थान पत्रिका का अभियान नहीं बदला। 'मिशन राजस्थान' के तहत पत्रिका ने इस मुद्दे को कभी दबने नहीं दिया। खबरों को जनचर्चा बनाया, जनचर्चा को जनदबाव और जनदबाव को जनहित का संकल्प। आज जब राजस्थान में रिफाइनरी का सपना साकार हो रहा है, तो यह केवल एक औद्योगिक परियोजना की कहानी नहीं, बल्कि उस प्रतिबद्ध पत्रकारिता की मिसाल भी है जिसने वर्षों तक एक सवाल जिंदा रखा राजस्थान के संसाधनों पर पहला अधिकार राजस्थान के विकास का ही होना चाहिए। यही राजस्थान पत्रिका की पहचान है, यही उसकी भूमिका।
पचपदरा रिफाइनरी के साथ पश्चिमी राजस्थान में 'राजस्थान पेट्रोजोन' विकसित करने की दिशा में बोरावास कला औद्योगिक क्षेत्र में काम तेज कर दिया है। रिफाइनरी आधारित उद्योगों के लिए तैयार किए जा रहे इस क्षेत्र में प्रथम चरण में सुविधाएं विकसित कर प्लॉट आवंटन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग-25 पर स्थित है, यहां सड़क, बिजली सहित बुनियादी ढांचा तैयार हो चुका है। रीको बोरावास प्रथम के अलावा यहीं द्वितीय चरण में भी प्लॉट चिह्नित कर रहा है। दोनों योजनाओं में कुल भूखंड 332 हैं।
प्रथम चरण में 29.77 हेक्टेयर भूमि पर 75 औद्योगिक भूखंड और 8 प्लग एंड प्ले फैक्टरी शेड का नियोजन किया गया है। अब तक 36 भूखंड 25 औद्योगिक इकाइयों को आवंटित किए जा चुके हैं, जिनमें 43.19 करोड़ रुपए निवेश और 476 लोगों को रोजगार मिलने का प्रस्ताव है। शेष भूखंडों के लिए आवंटन प्रक्रिया जारी है और नए आवेदनों पर कार्रवाई चल रही है।
Updated on:
04 Jul 2026 09:01 am
Published on:
04 Jul 2026 08:55 am
