- मरीजों को उठानी पड़ी परेशानियां- नाहटा अस्पताल में आयुष चिकित्सक संभाल रहे व्यवस्था
बालोतरा.
चिकित्सकों की प्रदेश व्यापी हड़ताल पर शहर व क्षेत्र के मरीजों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को प्राइवेट डॉक्टर्स एसोसियशन बालोतरा के दो घंटे कार्य का बहिष्कार करने से निजी चिकित्सक भी मरीजों को नहीं देख रहे थे। एेसे में उन्हें घंटों तक निजी अस्पतालों में कतार में खड़ा रहना पड़ा।नगर के राजकीय नाहटा चिकित्सालय में कार्यरत 16 चिकित्सकों में से ग्यारह चिकित्सक लंबे से हड़ताल पर हैं। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, चार एलोपैथिक चिकित्सकों सहित छह आयुष चिकित्सक व्यवस्थाएं संभाले हुए हैं। नाहटा चिकित्सालय में एलोपैथिक उपचार नहीं मिलने पर यहां उपचार के लिए नाममात्र मरीज पहुंच रहे हैं। इस पर यहां हर समय सूनापन पसरा रहता है। सोमवार को भी नाममात्र मरीज पहुंचे। वहीं इस दिन प्राइवेट डॉक्टर्स एसोसिएशन बालोतरा के आह्वान पर शहर के सभी निजी चिकित्सालयों के चिकित्सकों ने सुबह नौ से ग्यारह बजे तक कार्य का बहिष्कार किया। डॉ. प्रभुराम चौधरी ने बताया कि चिकित्सकों की मांगें जायज हैं। सरकार शीघ्र इनकी मांगें पूरी करें, अन्यथा निजी चिकित्सालयों के सभी चिकित्सक हड़ताल पर जाएंगे।
ओपीडी में चिकित्सक ही नहीं, किससे करवाएं उपचार
बाड़मेर पत्रिका. सेवारत चिकित्सकों की अनश्चितकालीन हड़ताल व सरकार की हठधर्मिता आमजन के लिए आफत बन गई है। जिले भर में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई है। चिकित्सकों व सरकार ने मरीजों को रामभरोसे छोड़ दिया है। इधर, दवाई विक्रेता का कहना है कि प्रतिदिन की बिक्री तीस फीसदी रह गई है।
जिले के राजकीय अस्पताल में सोमवार को ओपीडी 304 रही। यहां अस्पताल के वार्डों में सन्नाटा पसरा हुआ नजर आ रहा है। गंभीर मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार मिलता है। उसके बाद तत्काल रैफर किया जा रहा है। जिला अस्पताल में पीएमओ सहित अन्य चिकित्सक व्यवस्था संभाल रहे हैं, नाममात्र के चिकित्सकों के भरोसे मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। राजकीय अस्पताल में दो चिकित्सक मेडिकल कॉलेज से व्यवस्था के लिए भेजे गए हैं। वहीं सोमवार को निजी संस्थानों की ओर से लगाए गए तीन चिकित्सक सांकेतिक हड़ताल पर रहे।
वैकल्पिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं
राजकीय अस्पताल में हड़ताल के मद्देनजर वैकल्पिक व्यवस्था के लिए चिकित्सा विभाग ने केयर्न के चिकित्सक व अन्य आयुष विशेषज्ञों को लगा रखा है। लेकिन मरीज हमेशा उपचार लेने वाले चिकित्सक को तलाश रहे हैं। लेकिन चिकित्सक हड़ताल पर होने से ऐसे मरीज व परिजन निवास स्थल तक पता लगाते हैं, नहीं मिलने पर निराश लौट रहे हैं। लम्बा इलाज ले रहे कई मरीज पुरानी पर्ची से दवा लेकर काम चला रहे हैं।