
नियम-कायदे बनाना और फिर उसे भूल जाना। ऊपर से डंडा पड़ा तो खानापूर्ति की कार्रवाई अन्यथा नतीजा जीरो। सरकारी इमारतों पर पोस्टर चस्पा कर उसे बदरंग करने के मामले में प्रशासन की कार्रवाई इसी खानापूर्ति का हिस्सा बनी हुई है। कहने तो यह गुनाह है, जिसमें जेल से लेकर जुर्माना वसूली के प्रावधान है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस तरफ ध्यान दिया ही नहीं। नतीजा सामने है, पूरा शहर पोस्टरों से बदरंग बना हुआ है। जबकि कलक्टर से लेकर आयुक्त, प्रतिदिन इन्हें देखते हुए आते-जाते हैं।
यहां सर्वाधिक समस्या
शहर के न्यू वृद्धिचंद बस स्टैंड, ओवरब्रिज के आसपास, कलक्ट्रेट परिसर की बाहरी दीवारों, राजकीय चिकित्सालय, राय कॉलोनी रोड, राजकीय महाविद्यालय, एफसीआई की दीवारों, कन्या महाविद्यालय, गांधी चौक, शहर के मंदिरों व धर्मशालाएं की दीवारें पोस्टर व पम्फलेटों से अटी है।
पूरा अता-पता
सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए पोस्टरों पर संबंधित का नाम, पता व मोबाइल नम्बर भी लिखा रहता है। प्रशासन चाहे तो उसके आधार पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं लेकिन कुछ नहीं हो रहा।
क्या कहता है कानून
सम्पत्ति विरूपण अधिनियम 2006 के तहत सम्पत्ति की आकृति को विकृत करने, दूषित करने या अन्य प्रकार से क्षति पहुंचाने को विरूपण में शामिल किया गया है। इसमें नगर परिषद की बिना इजाजत पोस्टर, बैनर या अन्य प्रचार सामग्री लगाने पर 5 से 20 हजार रुपए जुर्माना व दो वर्ष के कारावास का प्रावधान है।