
बाड़मेर। भीषण गर्मी, कम बारिश और लगातार बदलते रेत के टीलों के बीच बाड़मेर में हरियाली बढ़ाने की पहल रंग लाने लगी है। वेदांता ऑयल एंड गैस के अनुसार, कंपनी ने पिछले दो वर्षों में जिले में 700 हेक्टेयर क्षेत्र में 3.5 लाख पौधे लगाए हैं। इनमें करीब 80 फीसदी पौधों के जीवित होने का दावा किया गया है। पौधों के संरक्षण के लिए वर्षाजल संचयन, नमी संरक्षण और नियमित निगरानी पर जोर दिया गया है।
पौधरोपण अभियान की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई। पहले चरण में धामडली, गोयणा महादेव, गंगाली और आवडी मांझी में 400 हेक्टेयर क्षेत्र में दो लाख पौधे लगाए गए। इसके बाद 2024 में जूनापटासर, बिजराड़, इटाडा, बांद्रा और खाखरलई में 300 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 1.5 लाख पौधे लगाए गए।
कम बारिश वाले इलाके में पौधों को जीवित रखना बड़ी चुनौती है। इसके लिए पौधरोपण स्थलों पर कंटूर व स्टैगर्ड ट्रेंच, क्रिसेंट बंड, माइक्रो-कैचमेंट और जल संग्रहण गड्ढे बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य बारिश के पानी को रोककर मिट्टी में नमी बनाए रखना है ।
परियोजना के तहत बाड़मेर की जलवायु के अनुकूल देशी और सूखा सहन करने वाली प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है। इनमें खेजड़ी, रोहिड़ा, नीम, कुमट, जाल, बेर, शीशम, अरडू, मोरिंगा, गूगल और जंगल जलेबी शामिल हैं। जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए सेवण और धामण जैसी देशी घासों की बुवाई भी की जा रही है।
पौधरोपण के लिए प्रजातियों के चयन, स्थल मूल्यांकन और तकनीकी मार्गदर्शन में वन विभाग ने सहयोग किया है। स्थानीय ग्रामीण पौधों की सुरक्षा और रखरखाव में भी भागीदारी निभा रहे हैं। कंपनी के अनुसार, पौधरोपण के दौरान कठोर भूमिगत सतह, मोरम की परत और आक्रामक वनस्पतियों जैसी चुनौतियां सामने आईं ।
वेदांता ऑयल एंड गैस के मुख्य पर्यावरण अधिकारी डॉ. बी. आर. जाट ने कहा कि बाड़मेर जैसे रेगिस्तानी क्षेत्र में 3.5 लाख पौधे लगाना हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ देशी पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता संरक्षण की दिशा में भी प्रयास है। उन्होंने अभियान में वन विभाग, स्थानीय समुदाय और पर्यावरण टीम के योगदान को महत्वपूर्ण बताया ।