बाड़मेर

Rajasthan News : सोशल मीडिया पर रविंद्र सिंह भाटी ने 782 शब्दों का किया ऐसा पोस्ट, जमकर हो रहा है वायरल

Ravindra Singh Bhati: रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार से सवाल किया कि हर बार हम तब सचेत होते हैं जब परिस्थितियां अनियंत्रित हो जाती हैं। सवाल यह है कि समय रहते हम सचेत क्यों नहीं हो रहे हैं?

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Jun 01, 2024
Ravindra Singh Bhati

Rajasthan News : बाड़मेर के केंद्रीय कारागृह में बंदी की मौत के मामले में बना गतिरोध गुरुवार देर रात खत्म हो गया। वार्ता में जेलर को निलम्बित करने और चिकित्सक को एपीओ करने का निर्णय हुआ। इसके बाद जेल के बाहर दो दिनों से चल रहा धरना खत्म हो गया। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी (Ravindra Singh Bhati) ने धरने पर पहुंच कर वार्ता की जानकारी देने के साथ धरना समाप्त करने की बात कही। हालांकि इसके बाद भी रविंद्र सिंह भाटी नहीं रुके। उन्होंने शनिवार को सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर एक पोस्ट लिखकर पहले तो सरकार को धन्यवाद दिया, लेकिन कई मुद्दों को लेकर जमकर खिंचाई भी कर दी। बता दें कि रविंद्र सिंह भाटी ने 782 शब्दों का पोस्ट लिखा है, जो कि वायरल हो रहा है।

भाटी ने लिखा कि हाल ही में बाड़मेर कारागृह (Death of prisoner in Barmer Jail) की जो घटना घटी, उसने प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बार फिर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। एक विचाराधीन कैदी को चिकन पॉक्स जैसी बीमारी होती है, 10 दिन तक उसका कोई संज्ञान नहीं लिए जाता है। इस संक्रामक बीमारी के बावजूद 50 डिग्री के पार तापमान में 150 की क्षमता वाले कारागृह में 250 कैदियों के साथ ही उसे रखा जाता है। जब उस कैदी की संदिग्धावस्था में मृत्यु होती है, तब उसके परिवार के साथ सर्वसमाज का धरना प्रदर्शन होता है और उस वक्त प्रशासन सक्रिय होता है। तब पता चलता है कि 10 से अधिक और कैदी इस बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं। सरकार ने संवेदनशीलता दिखा कर जेलर को निलंबित कर दिया और वहां के चिकित्सक को एपीओ किया। सरकार द्वारा लिया गया निर्णय निस्संदेह स्वागत योग्य है, लेकिन इस घटना ने हमारी संवेदनशीलता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। हर बार हम तब सचेत होते हैं जब परिस्थितियां अनियंत्रित हो जाती हैं। सवाल यह है कि समय रहते हम सचेत क्यों नहीं हो रहे?

Ravindra Singh Bhati ने पूछे सवाल

उन्होंने आगे लिखा कि पीबीआई की रिपोर्ट अनुसार भारत में 5 करोड़ 30 लाख न्यायिक मामले प्रक्रियाधीन हैं, जिनमें 1 लाख 69 हजार मामले ऐसे है जो 30 वर्षों से लंबित हैं। क्या न्यायपालिका का यह कर्तव्य नहीं है कि उन मामलों की प्राथमिकता तय की जाए। 31 दिसंबर, 2021 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत में 5.5 लाख कैदी हैं, जिनमें से 4.3 लाख (77%) विचाराधीन कैदी हैं। वहीं राजस्थान की जेलों में 22,938 कैदी हैं, जिनमें से 17,954 (78%) विचाराधीन कैदी हैं। राजस्थान की अधिकांशतः जेलों में उनकी क्षमता से अधिक कैदी हैं। जो अपराधी हैं, उसे न्यायपालिका दंडित करती है और उसे अपने कर्मों की सजा मिल जाती है, लेकिन उस अपराधी के साथ जेल में अमानवीय व्यवहार करना, उसे अपने मानवाधिकारों से वंचित करना, ये प्राकृतिक न्याय के विरूद्ध है। सरकार को चाहिए कि इस विषय पर एक संतुलित नीति लाई जाए, एक कैदी के साथ मानवीय संवेदनशीलता प्रस्तुत की जाए।

लंपी बीमारी को लेकर भी घेरा

आज से 2 साल पहले गायों में लंपी बीमारी आयी थी, डेढ़ लाख गायों की असामयिक मृत्यु हुई थी। सांचौर से गंगानगर तक पूरे सीमावर्ती क्षेत्र की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी। उस समय तात्कालिक सरकार असहाय स्थिति में थी, क्योंकि कोई पूर्व नियोजन सरकार के पास नहीं था। भगवान ना करे कि ऐसा हो बाकी ईमानदारी से सोचिए कि आज फिर इस दर्दनाक बीमारी की पुनरावृत्ति हो तो क्या हम इसका सामना करने के लिए तैयार हैं? जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिग के कारण यह पूर्व निर्धारित था कि राजस्थान में पारा 50 डिग्री के पार जाएगा। तो यह तो स्वाभाविक ही था कि विद्युत आपूर्ति की मांग बढ़ेगी। फिर हमने क्या पूर्व नियोजन किया? अब तक 150 से लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि ये स्थिति उस राज्य की है जो प्रतिदिन सर्वाधिक विद्युत उत्पादन करता है। विद्युत उत्पादन के बाद हम इसे सस्ती दरों पर निजी कंपनियों को बेचते हैं और फिर उन्हीं से वापस महंगी दरों पर खरीदते हैं।

भाटी ने सरकार को चेताया

पशुधन के लिए चारा डिपो और पेयजल आपूर्ति एक संवेदनशील मुद्दा हैं। हर साल मई और जून महीने में इनकी आपूर्ति अपरिहार्य होती है। फिर भी इस पर कोई चर्चा नहीं हो रही। और अभी भी आम जनता के साथ पशुधन प्रतीक्षा कर रहा है कि कब सरकार इस पर कोई न्यायसंगत और सर्वस्वीकार्य निर्णय लें। मानसून आने में 1 महीने का समय है। आज जल संकट की वजह से त्राहिमाम है तो महीना भर बाद जलभराव से तबाही होगी और ये हर साल होता है। तो क्या इस त्राहिमाम और तबाही के बीच कोई योजना नहीं बनाई जा सकती कि मानसून में पानी व्यर्थ न बहे। परंपरागत जलस्त्रोतों का संरक्षण कर उनको भरा जाए ताकि आने वाली गर्मियों में गांव प्यासे न रहें। जब कृषि अपनी चरम अवस्था में होती है तब यहां टिड्डी दल हमला कर लेता है और हम सचेत होते हैं। यह औसतन हर 3 वर्ष की समस्या हैं। क्या हम इसका समय रहते कोई स्थाई समाधान नहीं निकाल सकते कि इसकी पुनरावृत्ति ना हो? इस साल भी वैसा हुआ तो ठीक 3 महीने बाद हमें टिड्डी के हमले का सामना करना पड़ेगा। क्या हमारे पास अभी से उससे निपटने की कोई योजना है?

सरकार से पूछे सवाल

  • सवाल यह है कि हम परिस्थितियों को कब तक भगवान भरोसे छोड़ेंगे?
  • क्या हम आपदा आगमन से पूर्व समस्या का समाधान नहीं कर सकते?
  • आज हम अग्रणी राजस्थान, समृद्ध राजस्थान, विकसित राजस्थान जैसे मिशन को लेकर चल रहे हैं, सवाल यह है कि हमारे पास इस मिशन के लिए कोई रोडमैप है?
  • सवाल यह है कि समय रहते संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखाई जाती?
  • सवाल यह है कि हर बार आग लगने पर ही कुआं खोदने की याद क्यों आती है?
Published on:
01 Jun 2024 12:30 pm