चीन में हुए भीषण माइन ब्लास्ट को विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर के गिरल माइंस आंदोलन से जोड़ा। कहा- हादसा होने के बाद जागने से अच्छा है, समय रहते सुधरे भजनलाल सरकार।
बाड़मेर में गिरल लिग्नाइट माइंस के विरोध में श्रमिकों का आंदोलन पिछले करीब 45 दिन से चल रहा है, जबकि निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी को खुद इसके समर्थन में आंदोलन स्थल पर बैठे करीब 20 दिन हो गए हैं। लेकिन फिर भी ये विवाद ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है। बड़ी बात ये है विधायक भाटी ने इस आंदोलन के दौरान खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह की कोशिश करने तक का कदम उठाया, पर फिर भी विवाद का नतीजा अब तक शून्य ही साबित हो रहा है। इन सब के बीच अब विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने गिरल लिग्नाइट माइंस के श्रमिकों की आवाज़ उठाने को लेकर चीन देश का एक ताज़ा उदाहरण सामने रखा है और सरकार से स्थानीय श्रमिकों की सुध लेने की ओर इशारा किया है।
दरअसल, सुदूर चीन के शांक्सी प्रांत में हुए एक भीषण कोयला खदान विस्फोट में जब 90 मजदूरों के जिंदा दफन होने की खबर आई, तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई। MLA रविंद्र सिंह भाटी ने इस वैश्विक त्रासदी के दर्द को सीधे बाड़मेर के गिरल माइंस के धरातल से जोड़ दिया।
विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने वैश्विक स्तर पर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। चीन के शांक्सी प्रांत में एक खदान में हुए विस्फोट और इस घटना में श्रमिकों की मौत पर दुःख जताते हुए भाटी ने सोशल मीडिया पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने संवेदना व्यक्त करते हुए लिखा,
दुखद और चिंताजनक: "चीन के शांक्सी प्रांत स्थित एक कोयला खदान में हुए विस्फोट में लगभग 90 श्रमिकों के निधन का समाचार अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें।"
वैश्विक सुरक्षा पर सवालिया निशान: रविंद्र सिंह भाटी ने साफ शब्दों में कहा कि यह वीभत्स हादसा दुनिया भर की खदानों (चाहे वो चीन में हों या भारत के किसी कोने में) में कार्यरत मजदूरों की जमीनी सुरक्षा व्यवस्था और उनके वर्किंग एनवायरनमेंट पर बेहद गंभीर और तीखे सवाल खड़े करता है।
चीन की घटना का हवाला देते हुए रविंद्र सिंह भाटी तुरंत बाड़मेर की गिरल ओपन लिग्नाइट माइंस के मुद्दे पर आ गए। उन्होंने राजस्थान सरकार के मौन पर सबसे गहरा प्रहार किया है। गिरल में पिछले 40 दिनों से स्थानीय मजदूर अपनी जिन मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, उनकी पूरी हकीकत इस वैश्विक संदर्भ के बाद और अधिक गंभीर हो जाती है।
रविंद्र सिंह भाटी ने अपनी पोस्ट के जरिए साफ कर दिया है कि राजस्थान की भजनलाल सरकार और स्थानीय प्रशासन किसी बहुत बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। वे चाहते हैं कि जब तक कोई बड़ी अनहोनी न हो जाए, तब तक फाइलों को दबाकर रखा जाए।
भाटी का संदेश: "चीन का यह भयावह हादसा चीख-चीख कर कह रहा है कि खदानों में काम करने वाले मजदूरों की जिंदगी कितनी जोखिम में होती है। हमारी गिरल ओपन लिग्नाइट माइंस के मजदूर भी पिछले 40 दिनों से अपनी सुरक्षा मानकों, श्रमिक अधिकारों एवं अन्य जायज़ मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, लेकिन जिम्मेदार तंत्र अब भी पूरी तरह मौन साधे बैठा है। किसी बड़े हादसे के होने के बाद मुआवजे का ऐलान करने और जांच कमेटियां बिठाने के ढोंग से कहीं बेहतर है कि समय रहते इन मजदूरों की सुरक्षा, सुविधाओं और उनके जीवन की रक्षा सुनिश्चित की जाए।"
गिरल लिग्नाइट माइंस में काम करने वाले स्थानीय मजदूरों और ट्रक चालकों का आरोप है कि यहां नए टेंडर आने के बाद से उनके हितों पर सीधे तौर पर कुठाराघात किया जा रहा है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन और श्री मोहनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी के सामने अपनी जो प्रमुख मांगें रखी हैं, वे इस प्रकार हैं:
स्थानीय रोजगार को सर्वोच्च प्राथमिकता: बाड़मेर की धरती से निकलने वाले कोयले और लिग्नाइट पर पहला हक यहां के स्थानीय भूमिपुत्रों का होना चाहिए, न कि बाहरी राज्यों से लाए जा रहे डंपर चालकों का।
स्थानीय लोगों को हटाने का पुरजोर विरोध: श्रमिकों का कहना है कि नए ठेकेदार (कंपनी) ने आते ही बरसों से काम कर रहे स्थानीय मजदूरों और ड्राइवरों को नौकरी से निकालना शुरू कर दिया है, जो मरुधरा के युवाओं के पेट पर लात मारने जैसा है।
8 घंटे की शिफ्ट और फिक्स मानदेय: मजदूरों की मांग है कि श्रम कानूनों के तहत उनसे केवल 8 घंटे ही काम लिया जाए और नियमानुसार न्यूनतम वेतनमान की गारंटी दी जाए।