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Balotra: पिता का सहारा बनने गया था लाल, अब लड़ रहा जिंदगी की जंग; 5 दोस्तों को खो चुके हेमाराम ने बताया आंखों देखा हाल

Rajasthan Road Accident: बालोतरा के पचपदरा में भोमियाजी के दर्शन कर लौट रहे 8 दोस्तों की SUV डंपर से टकरा गई जिससे 5 युवकों की मौत हो गई और 3 गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में घायल हेमाराम ने बताया कि अचानक तेज आवाज के बाद वह बेहोश हो गया।
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अंतिम संस्कार और मृतकों की फाइल फोटो: पत्रिका

5 Friends Died In Balotra Accident: बालोतरा के पचपदरा थाना क्षेत्र में रविवार रात हुए सड़क हादसे ने कई परिवारों को कभी न भरने वाला दर्द दे दिया। कुलदेवता भोमियाजी के दर्शन कर लौट रहे 8 दोस्तों की SUV पहले एक अज्ञात वाहन से टकराई और इसके बाद अनियंत्रित होकर डंपर में जा घुसी। हादसे में 5 युवकों की मौत हो गई और 3 घायल जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। मृतकों में बालोतरा के कानोड गांव निवासी रेवंताराम (26), स्वरूपाराम (27), भरत (25), किशन (27) और भावेश शामिल हैं। हादसे की खबर गांव पहुंचते ही मातम छा गया। एक साथ 5 युवकों की मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिवारों में चीख-पुकार मच गई।

अचानक आई तेज आवाज और टकरा गई SUV

हादसे में घायल ने बताया कि सोमवार को उसका इंटरव्यू था इसलिए वह शुक्रवार को ही घर से दोस्तों के पास आ गया था ताकि साथ में घूमने का प्लान बना लेंगे। जिसके बाद रविवार को जोधपुर जाकर भोमियाजी के दर्शन करने का प्लान बना। हेमाराम ने बताया कि लौटते समय अचानक तेज आवाज आई और SUV टकरा गई जिसके बाद मैं बेहोश हो गया। होश आया जब आसपास लोगों के चीखने की आवाजें आ रही थी।

2 घंटे की मशक्कत के बाद निकाले शव

हादसा इतना भयावह था कि SUV के परखच्चे उड़ गए और टक्कर के बाद कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। एक युवक का शव अंदर फंस गया जिसे निकालने के लिए पुलिस और ग्रामीणों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस के अनुसार हादसे में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल दो युवकों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

चाचा-ताऊ के 3 बेटों की एक साथ मौत

इस हादसे ने एक परिवार को सबसे बड़ा झटका दिया। भरत, स्वरूपाराम और भावेश आपस में चाचा-ताऊ के बेटे थे। तीनों की एक साथ मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वहीं रेवंताराम और किशन भी अच्छे दोस्त थे और रोजगार की तलाश कर रहे थे। मृतकों में स्वरूपाराम शादीशुदा थे और बाकी युवक अविवाहित थे। कोई नौकरी कर परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहा था तो कोई बेहतर भविष्य के लिए पढ़ाई और रोजगार की तैयारी कर रहा था। एक सड़क हादसे ने कई परिवारों के सपनों को अचानक खत्म कर दिया।

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