मेरठ

जिम्मेदार ही अनजान, छात्रवृत्ति कहां अटकी, किसी को खबर नहीं!

- कॉलेज और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग दोनों बेखबर, एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी, छात्र हो रहे परेशान
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Updated: 19 Jul 2016, 11:13 AM IST
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कॉलेज के छात्र इंतजार कर रहे हैं कि उनकी छात्रवृत्ति का कार्य हो रहा है, लेकिन यहां तो जिम्मेदारों को ठीक से यह भी पता नहीं है कि छात्रवृत्ति अटकी क्यों है? कॉलेज तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में तालमेल के अभाव का खामियाजा छात्र भुगत रहे हैं।


राजकीय महाविद्यालय बाड़मेर में अध्ययन करने वाले 600 से अधिक अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को वर्ष 2015-16 की छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं हुआ है। आर्थिक दृष्टि से कमजोर छात्र इसको लेकर कॉलेज और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग का तकाजा कर रहे हैं। ऑनलाइन छात्रवृत्ति होने के बाद इनके डिजिटल हस्ताक्षर और कई अन्य आपत्तियां लगाकर आवदेन इधर-उधर हो रहे हैं। कॉलेज के चक्कर काट रहे छात्रों को अब तक यह भी नहीं पता है कि उन्हें छात्रवृत्ति क्यों नहीं मिल रही?

बाड़मेर के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के करीब 600 छात्रों ने इस बार छात्रवृत्ति के लिए नए नियमानुसार ऑफलाइन की बजाय ऑनलाइन आवेदन किए। 2015-16 का पूरा सत्र बीतने के बावजूद भी इन छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिली है।

आधे से ज्यादा में आपत्तियां

ऑनलाइन आवेदन करने वाले इन छात्रों में से आधे से ज्यादा की आपत्तियां लगी हुई है। यह आपत्तियां उन्होंने जो दस्तावेज संलग्न किए थे, उसको लेकर है। इसकी जानकारी उन्हें उनके मोबाइल पर देनी है, जो अभी तक नहीं मिली है। यह कार्रवाई जयपुर स्तर से होगी।

डिजिटल हस्ताक्षर में अटके

करीब 100 छात्रों के डिजिटल हस्ताक्षर सामाजिक अधिकारिता एवं न्याय विभाग को भेजना है। महाविद्यालय स्तर पर तकनीकी समस्या के चलते अभी तक यह कार्य नहीं हुआ है। अब इसे आगामी दिनों में करने की बात कही जा रही है।

खबर ही नहीं है

महाविद्यालय स्तर पर भी इसकी पूरी जानकारी नहीं है कि वास्तव में यह छात्रवृत्ति क्यों अटकी हुई है? इसको लेकर ऑनलाइन के नए नियमों की पूरी जानकारी नहीं होने व सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा कॉलेज में तालमेल की कमी भी सामने आ रही है।

छात्र परेशान है

सालभर बीतने के बावजूद भी छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं हुआ है। छात्र इससे परेशान है। इसमें जो भी जिम्मेदार हो वो अपना कार्य समय पर पूरा करे। इसके बाद भी बजट की कमी हो तो बताया जाए, इसके लिए छात्र आंदोलन करेंगे।

भूराराम गोदारा, छात्रसंघ अध्यक्ष

विभाग के पास है इस बार काम

हमारे पास तो डिजिटल दस्तखत करवाने हैं। इसके अलावा हमने फार्म फॉरवर्ड कर दिए हैं। अब सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से पता करें कि वहां पर क्या स्थिति है? बजट है या नहीं? तकनीकी कर्मचारी की कमी तो नहीं है? हमारी तरफ से तो सारा कार्य पूरा कर फार्म फॉरवर्ड कर दिए गए हैं।

डॉ. विमला आर्य, प्राचार्य, पीजी कॉलेज, बाड़मेर

हमारे पास तो आया ही नहीं

महेश कॉलेज के अलावा किसी भी कॉलेज ने हमें आवेदन फॉरवर्ड नहीं किए हैं। इस कारण छात्रवृत्ति जारी नहीं हुई है। बजट आने की बात तो दूसरी है। आवेदन फॉरवर्ड करेंगे तो ही हम आगे की कार्रवाई कर पाएंगे।

हेमंत खटीक, सहायक निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग

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