Sadhvi Prem Baisa: साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की गुत्थी और उलझ गई है। पोस्टमॉर्टम में आंतें लाल मिलने से जहर की आशंका बढ़ी है। कंपाउंडर द्वारा डेक्सोना इंजेक्शन देने और आश्रम के बाहर अस्थमा दवाएं मिलने पर पुलिस FSL रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
Sadhvi Prem Baisa News: मशहूर कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब और अधिक पेचीदा हो गया है। मौत के तीन दिन बाद आई प्राथमिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पुलिस और मेडिकल टीम के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
बता दें कि रिपोर्ट में 'कॉज ऑफ डेथ' (मौत का सटीक कारण) स्पष्ट नहीं हो पाया है। लेकिन इसमें एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने 'जहर' की आशंका को पुख्ता कर दिया है।
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, पोस्टमॉर्टम के दौरान साध्वी की छोटी और बड़ी आंतें पूरी तरह लाल पाई गई हैं। चिकित्सा विज्ञान में माना जाता है कि शरीर में किसी भी प्रकार का जहर या अत्यधिक तेज केमिकल पहुंचने पर आंतें इस तरह की प्रतिक्रिया देती हैं। हालांकि, पुलिस अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है।
मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए 'विसरा' (शरीर के आंतरिक अंग) को सुरक्षित रख लिया गया है और उसे एफएसएल (FSL) जांच के लिए भेजा गया है। एफएसएल रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि शरीर में जहर था या यह दवाओं का कोई घातक रिएक्शन था।
पुलिस इस मामले में कंपाउंडर देवी सिंह से गहन पूछताछ कर रही है, जिसने मौत से पहले साध्वी को इंजेक्शन लगाया था। पूछताछ में सामने आए मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं…
-कंपाउंडर ने बताया कि उसने साध्वी को 'डेक्सोना' इंजेक्शन लगाया था। यह एक शक्तिशाली स्टेरॉयड है।
-चौंकाने वाली बात यह है कि कंपाउंडर के अनुसार, साध्वी पहले भी कई बार डेक्सोना के इंजेक्शन लगवा चुकी थीं।
-बुधवार को कंपाउंडर को यह कहकर बुलाया गया था कि साध्वी को 'मामूली जुकाम' है, लेकिन उन्हें स्टेरॉयड दिया गया।
पुलिस को पाल रोड स्थित साधना कुटीर आश्रम के पास से 'अस्थालीन' दवा की खाली शीशियां और रैपर मिले हैं। यह दवा आमतौर पर अस्थमा (दमा) और सांस की गंभीर तकलीफों में इस्तेमाल की जाती है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या साध्वी किसी गंभीर सांस की बीमारी से जूझ रही थीं, जिसे अनुयायियों से छिपाकर रखा गया था? विशेषज्ञों का कहना है कि डेक्सोना की अधिक मात्रा या गलत दवाओं का मिश्रण जानलेवा हो सकता है।
जब इस मामले की पड़ताल करते हुए टीम उनके पैतृक गांव पहुंची, तो वहां का माहौल गमगीन मिला। ग्रामीणों ने बताया कि प्रेम बाईसा अपनी माता अमरू देवी के पदचिन्हों पर चलती थीं। साध्वी प्रेम बाईसा न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपनी कथाओं के लिए जानी जाती थीं। अपनी माता के निधन के बाद उन्होंने गांव के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
ग्रामीणों का कहना है कि आसपास रहने वाले कुछ लोगों के कारण उनकी बदनामी करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका व्यक्तित्व सीधा और सरल था। जोधपुर के कृपाराम जी महाराज के गुरुकुल से शिक्षा लेने वाली साध्वी का पूरा जीवन भक्ति और सेवा को समर्पित था।
-यदि आंतें जहर से लाल हुई हैं, तो वह शरीर के भीतर कैसे पहुंचा?
-कंपाउंडर को इंजेक्शन लगाने के निर्देश किसने दिए थे?
-क्या साध्वी लंबे समय से अस्थमा की मरीज थीं?
-क्या यह दवाओं का गलत डोज था या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है?
"हम मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहे हैं। एफएसएल रिपोर्टऔर विसरा जांच के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा होगा। फिलहाल, कंपाउंडर से मिली जानकारी के आधार पर कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।" -जोधपुर पुलिस