बाड़मेर

रण और क्रीक में दिखाई शक्ति, नभ-जल-थल ने किया सागर अभ्यास

- कच्छ के क्रीक व रण सेक्टर में हुआ 'सागर शक्ति अभ्यास' नजर आई जल, थल और नभ की ताकत,घुसपैठ व सुरक्षा को मिलेगी मजबूती  
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Updated: 23 Nov 2021, 8:03 PM IST
Sagar Shakti Exercise
Sagar Shakti Exercise

बाड़मेर.
पश्चिमी सीमा में कच्छ के रण का वो इलाका जहां से मछुआरों के जरिए घुसपैठ करने और क्रीक और रण को कमजोर कड़ी मानकर बार-बार दुश्मन देश की ओर से टारगेट करने के मंसूबे पाले जाते है अब भारत ने उसी क्षेत्र को मजबूत और मुश्तैद करने के इरादे से चार दिवसीय सागर शक्ति अभ्यास में नभ, जल और थल से आंतरिक सुरक्षा की मजबूती का अभ्यास किया। सेना, नौसेना, भारतीय तट रक्षक, सीमा सुरक्षा बल एवं पुलिस का चार दिवसीय संयुक्त अभ्यास सोमवार को संपन्न हुआ। वर्ष 2000 के बाद पहली बार कच्छ के इस इलाके में यह प्रयास हुआ है।

पश्चिमी सरहद की आंतरिक सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से कच्छ प्रायद्वीप के क्रीक व रन सेक्टर में पहली बार भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का आक्रामक रूख के साथ संयुक्त अभ्यास चार दिवस में सोमवार को समाप्त हुआ। इस समुद्री आक्रामक का नाम सागर शक्ति अभ्यास रखा गया था।

जवाबी तंत्र वो भी संयुक्त
पश्चिमी सरहद पर वर्तमान व आगे आने वाले विभिन्न नए खतरों व घुसपैठ के प्रति संयुक्त जबावी तंत्र को विकसित करने के लिए केन्द्रीय व राजकीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ भारतीय सेना, नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल, सीमा सुरक्षा बल व राज्य पुलिस बल को एक सूत्र में बांधना था। विलक्षणताओं युक्त यह अभ्यास वर्ष 2000 से किया जा रहा है, लेकिन कच्छ प्रायद्वीप में पहली बार आक्रामक रूख को ध्यान में रखते विशेष मैदानी प्रशिक्षण अभ्यास हुआ। अभ्यास में उच्च कुशल सैनिकों ने सटीक सूचना व सुनिश्चितता को देखते हुए हवाई व तटवर्ती के साथ-साथ स्थलीय बलों का उपयोग कर आगे बढऩा व शत्रु को निष्प्रभावी करना सिखाया। अभ्यास मुख्यालय दक्षिण कमान पुणे के अधीन आयोजित किया गया।

नाव की मदद से घुसपैठ
क्रीक और रण के इस इलाके में नाव के जरिए घुसपैठ होती रही है। इस इलाके में किस तरह से मजबूती के साथ रण के इलाके को पार करने के साथ घुसपैठ को रोका जाए इसका अभ्यास करवाया गया। अभ्यास के तहत मुख्य अति संवेदनशीन क्षेत्रों में राष्ट्र विरोधी तत्वों पर हमले की जवाबी कार्यवाही का प्रशिक्षण दिया गया।

जल-थल-नभ से संयुक्त
इस दौरान घुसपैठ को जवाब देने के लिए नौसेना की रक्षा पंक्ति, सेना और भारतीय तटरक्षक बदल सहित सीमा सुरक्षा बल के समन्वय के साथ खासियत रही राज्य पुलिस बल को भी जोडऩा, जिससे संयुक्त कार्यवाही को बल मिले।
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