
सेड़वा/ बाड़मेर . सरकार ने आनन-फानन में स्कूलों को आदर्श तो बना दिया, लेकिन आवश्यक सुविधाएं देना भूल गए। स्कूल समायोजन प्रक्रिया ने भी परेशानी बढ़ा दी है। क्षेत्र की राआउमावि तरला में हालत यह है कि में 12 कक्षाओं के लिए महज 5 कक्षाकक्ष ही है। ऐसे में 7 कक्षाओं के विद्यार्थियों को या तो आसमां तले पढऩा पड़ रहा है या फिर पेड़ के नीचे और बरामदे में बैठना पड़ रहा है। दरअसल, शिक्षा विभाग ने वर्ष 2014-15 में इस विद्यालय को आदर्श विद्यालय का दर्जा दिया। यहां 1 से 12 तक की कक्षाओं का संचालन हो रहा है, लेकिन कमरों की कमी बरकरार है।
2 में स्टाफ, 1 में पक रहा पोषाहार
इस विद्यालय में कुल 8 कमरे बने हुए हैं। इसमें से 2 कमरों में विद्यालय का स्टाफ रहता है। वहीं एक कमरे में छात्रों के लिए पोषाहार पकाया जाता है। ऐसे में 5 कमरों में ही कक्षाओं का संचालन हो रहा है।
पदरिक्तता की भी समस्या
आदर्श विद्यालय में प्रधानाचार्य सहित व्याख्याताओं के सभी पद रिक्त हैं। विद्यालय में 3 व्याख्याताओं के पद स्वीकृत है। इसके अलावा वरिष्ठ अध्यापक के दो, तृतीय श्रेणी प्रथम तथा द्वितीय स्तर के शिक्षकों के 3 पद रिक्त हैं। ऐसे में स्वीकृत 20 में से महज 8 पदों पर ही शिक्षक हैं।
नहीं मिल रही कम्प्यूटर शिक्षा
जिले की सरकारी हाई स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा अनिवार्य है। स्कूलों में कम्प्यूटर लैब की व्यवस्था है, जहां बच्चों को कम्प्यूटर की प्रेक्टिकल व थ्योरिकल पढ़ाई होती है, लेकिन इस विद्यालय में न लैब है और ना ही कम्प्यूटर। ऐसे में छात्र कम्प्यूटर शिक्षा से महरूम हैं।
पढ़ाई हो रही चौपट
विद्यालय में कमरों की कमी के कारण छात्रों को सर्दी के मौसम में बाहर खुले परिसर में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। पद रिक्तता के कारण बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है।-हुकमीदान चारण, ग्रामीण तरला
भविष्य दांव पर
स्कूल में शिक्षकों की कमी के साथ छात्रों के लिए कम्प्यूटर शिक्षा की भी कोई व्यवस्था नहीं है। इससे बच्चों को न तकनीकी शिक्षा मिल रही है और ना ही समय पर कोर्स पूरा हो पाता है। -भरतदान चारण, पूर्व सरपंच, तरला
रमसा को भेजी डिमाड
नए कक्षा-कक्ष निर्माण के लिए रमसा में डिमाण्ड भेज रखी है। वहां से स्वीकृति के बाद ही इस समस्या का समाधान हो पाएगा।- आशाराम सारण, कार्यवाहक प्रधानाचार्य, राआउमावि तरला