बाड़मेर

शहादत को सलाम: बाड़मेर के पहले शौर्य चक्र विजेता शहीद धर्माराम जाट की वीर गाथा, गोली लगने पर भी नहीं झुके, 2 आतंकियों को किया ढेर

Shahadat Ko Salam: बाड़मेर के पहले शौर्य चक्र विजेता शहीद धर्माराम जाट की वीरता 25 मई 2015 के ऑपरेशन में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान अदम्य साहस का उदाहरण है। पेट में गोली लगने के बाद भी उन्होंने अंतिम सांस तक लड़ते हुए दो आतंकियों को ढेर किया और अपने कमांडर व साथियों की जान बचाई।
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Jan 19, 2026
Shahadat Ko Salam
Barmer first Shaurya Chakra winners Dharmaram Jat Story (Patrika Photo)

Shahadat Ko Salam: देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले बाड़मेर जिले के पहले शौर्य चक्र से सम्मानित वीर सपूत शहीद धर्माराम जाट की शहादत आज भी हर देशवासी के दिल में गर्व और भावुकता का संचार करती है। आतंकियों से मुठभेड़ में गोली लगने के बावजूद वे लड़ते रहे। उनकी याद में बना शहीद स्मारक का उद्घाटन खुद जनरल विपिन रावत ने किया था।

घटना 25 मई 2015 की है। जम्मू-कश्मीर के अतिदुर्गम क्षेत्र पुलवामा में सेना के गश्ती दल को सूचना मिली कि आतंकवादी एक गांव में छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही राष्ट्रीय राइफल्स की टुकड़ी ने इलाके को घेर लिया।

इसी दौरान आतंकियों ने सेना पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दी। गश्ती दल के कमांडर की सुरक्षा में तैनात जवान धर्माराम जाट ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए मोर्चा संभाला। उनकी पैनी नजरों ने देखा कि एक आतंकी छत पर पहुंचकर गोलियां चला रहा है। कमांडर और साथियों की रक्षा करते हुए धर्माराम ने साहसिक कार्रवाई कर आतंकी को ढेर कर दिया।

घायल होकर भी नहीं छोड़ा मोर्चा

इसी दौरान दूसरे आतंकी से आमने-सामने की मुठभेड़ में धर्माराम के पेट के निचले हिस्से में गोली लग गई। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अंतिम सांस तक लड़ते हुए उन्होंने दूसरे आतंकी को भी मार गिराया और अपने कमांडर व साथियों की जान बचाई। ऑपरेशन के बाद उन्हें सेना के हेलीकॉप्टर से सैन्य अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। मातृभूमि की रक्षा करते हुए यह वीर सपूत अमर हो गया।

गांव विलासर का वीर सपूत

शहीद धर्माराम जाट बाड़मेर की ग्राम पंचायत तारातरा के विलासर गांव के निवासी थे। सादे जीवन और मजबूत संकल्प वाले धर्माराम देशसेवा को ही अपना सर्वोच्च धर्म मानते थे। उनकी इस अद्वितीय वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।

गांव में शहीद के नाम स्कूल का नामकरण नहीं हुआ

शहीद धर्माराम की पत्नी वीरांगना टीमू देवी, मां अमरू देवी और भाई बिंजाराम आज भी उनके बलिदान पर गर्व करते हैं। यह परिवार आज भी देशसेवा की प्रेरणा का प्रतीक बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि धर्माराम को शहीद हुए करीब 10 साल बीत गए, लेकिन अभी तक उनके गांव के स्कूल का नामकरण शहीद के नाम पर नहीं हुआ है।

राजस्थान पत्रिका ने किया सम्मान

राजस्थान पत्रिका के शहादत को सलाम कार्यक्रम के तहत रविवार को शहीद धर्माराम की वीरांगना टीमू देवी का पत्रिका कार्यालय में सम्मान किया गया। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता करनाराम चौधरी, रघुवीर सिंह तामलोर, राजस्थान पत्रिका बाड़मेर के संपादकीय प्रभारी योगेंद्र सेन, चीफ रिपोर्टर भवानी सिंह राठौड़ ने स्मृति चिंह, शॉल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया।

Published on:
19 Jan 2026 12:40 am