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बालोतरा.
प्रदेश में सक्रिय हुए मानसून के थम जाने से जिले के हजारों किसानों, पशुपालकों की रातों की नींद उड़ गई है। गर्मी, उमस के माहौल पर हर दिन आसमान में बादल छाते हैं, लेकिन शाम को चलने वाली हवाओं पर ये गायब हो जाते हैं। इससे किसानों, पशुपालकों के अलावा आमजन परेशान है। जिले में अब तक 87 हजार हैक्टयर में खरीफ की बुवाई हुई है।
खेतों को बुवाई के लिए इन्हें तैयार करने के बाद से जिले भर के ग्रामीण वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। प्रदेश में 21 जून के आस पास मानसून प्रवेश करता है। इसके चार-पांच दिन बाद इसके सक्रिय होने पर पूरे प्रदेश में अच्छी वर्षा होती है। इस पर मानसून के प्रदेश में प्रवेश करने व बरसने के कुछ दिन बाद ही सुस्त पडऩे से किसानों, पशुपालकों व आमजन की परेशानियां बढ़ गई है। हर दिन गर्मीव उमस होने पर सुबह व दोपहर में आसमान में बादल छाते हंै। इससे शीघ्र अच्छी वर्षा होने को लेकर हर कोई उत्साहित होता है। लेकिन शाम होने के साथ चलने वाली ठण्डी हवाओं पर बादलों के गायब होने से किसानों, पशुपालकों की परेशानी बढ़ गई। वर्षामें देरी को लेकर आमजन चिंतित है।
लक्ष्य से नाममात्र बुवाई
जिले में अब तक हुई कम वर्षा पर खरीफ फसल की नाममात्र बुवाई हुई है। जिले में अब तक 45 हजार हैक्टयर में बाजरा, 27 हजार हैक्टयर में बाजरा व मोठ, 7 हजार हैक्टयर में मंूग, 3 हजार हैक्टयर में मूंगफली, 2500 हैक्टयर में मोठ, 1 हजार हैक्टयर में ज्वार, 700 हैक्टयर में तिल, 300 हैक्टयर में हरा चारा, 200 हैक्टयर में अन्य फसल की बुवाई की गई है। जिले में खरीफ बुवाई लक्ष्य 15 लाख 51 हजार में से अब तक नाममात्र 87 हजार हैक्टयर बुवाई हुई है। एक सप्ताह में अच्छी वर्षा नहीं होने व हवाएं चलने पर खेतों में उगी फसल भी जलकर राधा होगी। इससे किसानों के जुताई-बुवाई के रूप में खर्च किए हजारों रुपए व्यर्थ जाएंगे। तालाब-नाडियों में पानी की नहीं हुई आवक पर पशुपालकों की हालत खस्ताहाल हो रखी है। इस पर किसान, पशुपालक वर्षा हो लेकर ईश्वर को मनाने में जुटे हुए हैं।
थमी बुवाई
जिले में अब तक 87 हजार हैक्टयर में बुवाई हुई है। वर्षा नहीं होने पर बुवाई का काम थम गया है। वर्षा पर फिर शुरू होगा।
- पदमसिंह भाटी, सहायक निदेशक कृषि विभाग बाड़मेर