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सिवाना. सिवाना व क्षेत्र के विकास को लेकर सरकार व जनप्रतिनिधि बढ़चढ़ कर दावे कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि सिवाना क्षेत्र के दो तिहाई गांव आज भी रोडवेज सेवा से वंचित है। इस पर ग्रामीण निजी बसों से सफर करने को मजबूर है। निजी बस संचालकों के अधिक किराया वसूलने व क्षमता से अधिक सवारियां भर बसों का संचालन करने से यात्री शोषण के शिकार बन रहे हैं। विधानसभा व उपखंड मुख्यालय सिवाना क्षेत्र में रोडवेज सुविधा नाम मात्र होने पर आज भी ग्रामीण निजी बसों से सफर करने को मजबूर है। उपखंड की 50 ग्राम पंचायतों में से सिवाना तहसील की देवन्दी, धीरा, सेला, पादरड़ी, कुण्डल, वेरानाड़ी, पंऊ, कांखी, इटवाया, इंद्राणा, मोतीसरा, मेली व तहसील समदड़ी क्षेत्र की 21 ग्राम पंचायतों सहित कुल 33 ग्राम पंचायत मुख्यालय रोडवेज सुविधा से नहीं जुड़े हुए हैं। सिवाना के अलावा काठाड़ी, मोकलसर, मायलावास, रमणिया, कुसीप, थापन, मूठली ही रोडवेज बस सेवा से जुड़े हुए हैं।
व्यस्ततम मार्ग पर संचालित हो रही निजी बसें- उपखंड मुख्यालय सिवाना से समदड़ी-जोधपुर सड़क मार्ग प्रमुख रूप से जुड़े हुए हंै। जोधपुर-समदड़ी क्षेत्र के लिए बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं, लेकिन इन मार्गों पर रोडवेज बसें संचालित नहीं होती है। इस पर ग्रामीणों को निजी बसों से यात्रा करनी पड़ती है। इनके महंगे किराए से ग्रामीणों को अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। परेशान ग्रामीण कई बार सरकार व जनप्रतिनिधियों से इन मार्गों पर रोडवेज बस सेवा शुरू करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। निप्र.
इधर,संकेतक बोर्ड का अभाव, हादसों की आशंका
पादरू. मिठौड़ा - धनवा रोड पर खतरनाक मोड के संकेतक बोर्ड नहीं लगने होने पर रात्रि के समय दुर्घटनाएं होती हैं। वहीं वाहन चालक मार्ग भटकते हैं। परेशान वाहन चालकों व ग्रामीणों की मांग करने के बावजूद सार्वजनिक निर्माण विभाग इस आेर ध्यान नहीं दे रहा है।