
बाड़मेर. बाड़मेर के सिणधरी चौराहे से कुड़ला-शिवकर तक के करीब पांच किमी में अटका स्टेट हाइवे का काम शीघ्र शुरू होने की उम्मीद जगी है। लम्बे समय से इस मार्ग पर परेशानी झेलने वालों को बड़ी राहत मिलेगी। बरसात से पूर्व काम शुरू हो जाने पर जल्द की परेशानियों से निजात मिल सकेगी। उल्लेखनीय है कि यह मार्ग बाड़मेर को जालोर से जोड़ेगा।
बाड़मेर- जालोर स्टेट हाइवे की शुरुआत सिणधरी चौराहे से होनी है। चौराहे से पांच किमी दूर कुड़ला-शिवकर तक फोरलेन की डिजाइन तैयार करवाई गई है। लेकिन ग्रामीणों की शिकायत व रिकॉर्ड के अनुसार 24 फीट सड़क के लिए जमीन कटाण की गई है। लेकिन अब फोरलेन के लिए 100 फीट की जरूरत है। ऐसे में यह निर्माण अटक गया। इधर, ग्रामीण खातेदारी भूमि अधिग्रहण की एवज में मुआवजा दिलाने की मांग कर रहे हैं। जबकि विभाग का दावा है कि सड़क का चौड़ाईकरण प्रस्तावित ही नहीं है। इससे इस क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं है। स्टेट हाइवे तो पूर्व में यहां बना हुआ था।
काम शुरू होते ही लगा अड़ंगा
शहर के सिणधरी चौराहे से शिवकर-कुड़ला तक पहले टू-लेन बनना था। बाद में विभाग ने नई डिजाइन बनवाकर फोरलेन करवाया है। इस बीच काम भी शुरू कर सड़क पर गिट्टी डाल दी गई। लेकिन ग्रामीणों का विरोध था कि फोर लेन बनने से उनकी जमीन हाइवे के दायरे में आ जाएगी। इसके चलते संबंधित एजेंसी को काम बीच में रोकना पड़ा। हाइवे का काम बीच में रोकने का खमियाजा सबसे अधिक बाड़मेर के सिणधरी रोड से आवाजाही करने वालों, यहां के निवासियों व व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है। पहले सड़क क्षतिग्रस्त थी। अब गिट्टी से गड्ढ़े भरे गए तो पूरे दिन वाहनों की आवाजाही से उड़ती मिट्टी भारी परेशानी का कारण बन गई है।
बरसात से पहले बने हाइवे
मानूसन सिर पर है। पिछले दो सालों से बरसात के दौरान इस मार्ग पर आवाजाही एक तरह से बाधित हो जाती है। सड़क दरिया बन जाती है। राहगीर तो दूर वाहन भी नहीं निकल पाते हैं। सिणधरी रोड पर रहने वाले लोगों व व्यापारियों को भी यह उम्मीद है कि बरसात से पहले अगर रोड बन जाती है तो काफी राहत मिलेगी।
एक नजर: बाड़मेर-जालोर स्टेट हाइवे
- 300 करोड़ आएगी हाइवे की लागत
- 02 साल में बनकर होना है तैयार
- 148 किमी होगी लम्बाई
- सितम्बर 2017 में काम हुआ था शुरू
कोई रोक नहीं
फोरलेन की डिजायन तैयार हो रही है। कोई रोक नहीं है। सड़क का काम चल रहा है। जल्द ही शहर को फोरलेन से जोड़ा जाएगा। -
निरंजन चौधरी, पीडब्ल्यूडी विंग जोधपुर