पिता की असामयिक मृत्यु होने पर उसकी बेटियों ने ही अर्थी को कंधा देने सहित अंतिम संस्कार की रस्में अदा की।
आंधी। बेटा-बेटी में समानता रखने के प्रति सरकारों द्वारा चलाई गई मुहिम एवं सामाजिक संगठनों द्वारा आमजन में जगाई जाग्रति का सकारात्मक परिणाम अब गांवों में भी दिखने लगा है। इस एक उदहारण बुधवार शाम क्षेत्र के समीपवर्ती गांव रामपुरा उर्फ महाराजपुरा में देखने को मिला, जहां एक पिता की असामयिक मृत्यु होने पर उसकी बेटियों ने ही अर्थी को कंधा देने सहित अंतिम संस्कार की रस्में अदा की।
गांव में हुई इस पहल की चर्चा ग्रामीणों में है। परिजनों के अनुसार रामपुरा उर्फ महाराजपुरा निवासी भजनलाल मीणा (45) ट्रक पर खलासी का काम करके परिवार का लालन-पालन करता था। भजनलाल के पुत्र नहीं था, उसके पांच बेटियां ही है। मंगलवार को वह अजमेर में आदर्श नगर थाना क्षेत्र में स्थित एक कारखाने में सामान भरकर गए एक ट्रक के साथ गया था। रात्रि में खाना खाने के बाद वह सो गया। सुबह ट्रक ड्राइवर रामकेश मीणा ने उसको उठाया तो वह उठा ही नहीं।
चिकित्सकों को दिखाने पर पता चला की ह्दयाघात से उसकी मौत हो गई। बुधवार अपराह्न परिजन उसका शव लेकर घर रामपुरा पहुंचे। यहां पर अर्थी को कंधा देने की बारी आई तो पुत्र नहीं होने की कसक परिजनों को खलने लगी। जिसके बाद परिजनों ने उसकी बेटियों से ही अंतिम संस्कार की रस्में अदा करवाने का निर्णय लिया। जिसके बाद भजनलाल लाल की बेटियां रीना व पिंकी ने अर्थी को कंधा दिया अन्य बेटियों अर्चना, नसीला व बसबाई ने अन्य रस्में अदा की।