राज्य सरकार की कोटपूतली बहरोड़ जिले में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) को बढ़ावा देने की योजना फिलहाल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। पाइपलाइन नेटवर्क के अभाव में अधिकांश उपभोक्ताओं को अब भी एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे आमजन से लेकर उद्योग तक प्रभावित हो रहे हैं। जिले में घरेलू, […]
राज्य सरकार की कोटपूतली बहरोड़ जिले में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) को बढ़ावा देने की योजना फिलहाल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। पाइपलाइन नेटवर्क के अभाव में अधिकांश उपभोक्ताओं को अब भी एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे आमजन से लेकर उद्योग तक प्रभावित हो रहे हैं। जिले में घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को पीएनजी से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका असर नगण्य है। वर्तमान में पूरे जिले में केवल केशवाना औद्योगिक क्षेत्र तक ही पीएनजी की सुविधा सीमित है, वह भी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाई है। तकनीकी खामियों के कारण यहां भी केवल एक औद्योगिक इकाई ही पीएनजी से जुड़ पाई है, जबकि अन्य इकाइयां अब भी एलपीजी पर निर्भर हैं।
एलपीजी आपूर्ति में अनियमितता के चलते फैब्रिकेशन और अन्य गैस आधारित उद्योगों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कई इकाइयों में काम ठप होने की स्थिति बन रही है, जिससे श्रमिकों का पलायन भी बढ़ने लगा है। यह स्थिति स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएनजी नेटवर्क के विस्तार में देरी से घरेलू उपभोक्ता, छोटे व्यवसायी, होटल-ढाबा संचालक और औद्योगिक इकाइयां प्रभावित हो रही हैं। रसोई गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा अब भी एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर है, क्योंकि पीएनजी का नेटवर्क सीमित शहरों तक ही सिमटा हुआ है।
45 दिन में हो रही गैस बुकिंग
प्रशासन ने हाल ही में दावा किया था कि ग्रामीण क्षेत्रों में 25 दिन के भीतर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। ग्रामीण उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर के बाद दूसरे सिलेंडर की बुकिंग के लिए 45 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार कोटपूतली क्षेत्र के अधिकांश उपभोक्ता अब भी ग्रामीण श्रेणी में शामिल हैं। नगर परिषद क्षेत्र में आने वाली 15 ग्राम पंचायतों के निवासी भी इसी श्रेणी में हैं, जिससे उन्हें शहरी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।
क्या है पीएनजी और क्यों जरूरी
पीएनजी पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों और उद्योगों तक गैस आपूर्ति की सुविधा देता है। यह एलपीजी की तुलना में अधिक सुरक्षित और किफायती माना जाता है। इसमें सिलेंडर फटने या लीकेज का खतरा नहीं होता और बुकिंग व स्टोरेज की परेशानी भी खत्म हो जाती है। पर्यावरण के लिहाज से भी यह बेहतर विकल्प है।
जिले की वर्तमान स्थिति…
—पीएनजी सुविधा केवल केशवाना औद्योगिक क्षेत्र तक सीमित
—तकनीकी बाधाओं के कारण केवल एक इकाई जुड़ी
—90 प्रतिशत से अधिक उपभोक्ता एलपीजी पर निर्भर
—सिलेंडर बुकिंग का अंतराल करीब 45 दिन